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रक्तदान शिविर के लिए सिविल सर्जन कार्यालय से लेनी होगी अनुमति

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सरकारी अस्पतालों में जरुरतमंदों को बिना पैसा लिए डोनर के एक्स्चेंज पर दिया जाता है रक्त

धनबाद । रक्तदान शिविर लगाने के लिए आयोजकों को सिविल सर्जन कार्यालय को सूचित करना होगा और अनुमति भी लेनी होगी। बगैर अनुमति के रक्तदान शिविर का आयोजन करना गैर कानूनी माना जाएगा।

इस संबंध में सिविल सर्जन डॉ आलोक विश्वकर्मा ने सभी आयोजकों से अपील करते हुए कहा कि वे रक्तदान शिविर का आयोजन करने से पूर्व सिविल सर्जन कार्यालय को लिखित में सूचित करेंगे और आयोजन की अनुमति भी लिखित में प्राप्त करेंगे। शिविर के समापन पर कितना रक्त संग्रह हुआ और उसे कहां रखेंगे, इसकी भी सूचना उपलब्ध करएंगे।

उन्होंने कहा कि जिले में हर 2 – 3 दिनों के अंतराल में रक्तदान शिविर लगाए जाते हैं। जिसकी सूचना सिविल सर्जन कार्यालय को नहीं दी जाती है और ना ही अनुमति ली जाती है।

उन्होंने कहा कि वे एक रक्तदान शिविर में गए थे। वहाँ देखा की गरीब डोनर का रक्त लिया जा रहा है। इस संबंध में पता करने पर जानकारी मिली कि शिविर का आयोजन विशेष रूप से किसी व्यवसायिक उपयोग के लिए या निजी नर्सिंग होम या निजी सुपर स्पेशलिस्ट हॉस्पिटल के लिए किया जा रहा है।

वहीं जब गरीब डोनर को रक्त की आवश्यकता होती है तब उसे काफी परेशानियां का सामना करना पड़ता है। निजी नर्सिंग होम में राशि लेकर रक्त दिया जाता है जबकि सरकारी अस्पतालों में जरुरतमंदों को बिना पैसा लिए डोनर के एक्स्चेंज पर रक्त दिया जाता है।

सिविल सर्जन ने रक्तदान शिविर के सभी आयोजकों से अनुरोध किया है कि वे आयोजन करने से पूर्व अनुमति जरूर लें।

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Written by
Yudhishthir Mahato

युधिष्ठिर महतो | पत्रकार एवं लेखक युधिष्ठिर महतो वर्ष 2017 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय पत्रकार, लेखक, गीतकार और जनसंपर्क पेशेवर हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत रिपोर्टर के रूप में की और समाचार पत्रों, न्यूज़ पोर्टलों तथा टीवी चैनलों में काम करते हुए मीडिया के विभिन्न प्रारूपों में अनुभव हासिल किया। वे झारखंड क्रांति खबर में उप-संपादक के रूप में भी कार्य कर चुके हैं। वर्तमान में वे पत्रकारिता के साथ जनसंपर्क एवं संचार कार्य से जुड़े हैं और धनबाद तथा झारखंड से संबंधित सामाजिक, राजनीतिक, प्रशासनिक एवं जनसरोकार के मुद्दों पर लगातार लिखते हैं। Aaryaa News पर उनके नाम से प्रकाशित खबरों में स्थानीय घटनाक्रम से लेकर राज्य की महत्वपूर्ण राजनीतिक एवं सामाजिक गतिविधियां शामिल हैं। उन्होंने बिनोद बिहारी महतो कोयलांचल विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एम.ए. किया है। पत्रकारिता के साथ उन्हें साहित्य और रचनात्मक लेखन में भी विशेष रुचि है। वे हिंदी और खोरठा में गीत एवं कविताएं लिखते हैं और उनके लिखे कई गीत विभिन्न ऑडियो प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हैं। पत्रकारिता, जनसंपर्क और रचनात्मक लेखन—इन तीनों क्षेत्रों में सक्रियता युधिष्ठिर महतो की पेशेवर पहचान को अलग आयाम देती है।

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