Home झारखण्ड पूर्व मुख्यमंत्री दिशोम गुरु शिबू सोरेन को समाहरणालय में दी गई श्रद्धांजलि
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पूर्व मुख्यमंत्री दिशोम गुरु शिबू सोरेन को समाहरणालय में दी गई श्रद्धांजलि

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धनबाद । पूर्व मुख्यमंत्री दिशोम गुरु शिबू सोरेन के निधन पर गुरुवार को समाहरणालय सभागार में शोक सभा का आयोजन किया गया। उपायुक्त आदित्य रंजन, वरीय पुलिस अधीक्षक प्रभात कुमार सहित सभी वरीय पदाधिकारियों व कर्मियों ने दिशोम गुरु की तस्वीर पर माल्यार्पण व पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। दो मिनट का मौन रखकर आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की।

उपायुक्त आदित्य रंजन ने कहा कि दिशोम गुरु शिबू सोरेन भारत की आदिवासी चेतना के महानायक थे। उनका संघर्ष, बलिदान व नेतृत्व सदैव आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देता रहेगा। झारखंड की माटी के कण-कण में जीवंत रहेंगे।

श्रद्धांजलि सभा में उप विकास आयुक्त सादात अनवर, अपर समाहर्ता विनोद कुमार, निदेशक डीआरडीबी राजीव रंजन, अनुमंडल पदाधिकारी राजेश कुमार, जिला पंचायती राज पदाधिकारी मुकेश बावरी, जिला शिक्षा पदाधिकारी अभिषेक कुमार झा, जिला शिक्षा अधीक्षक आयुष कुमार, जिला समाज कल्याण पदाधिकारी अनीता कुजुर, जिला जनसंपर्क पदाधिकारी सुनील कुमार सिंह, सहायक निदेशक सामाजिक सुरक्षा नियाज अहमद के अलावा अन्य जिलास्तरीय पदाधिकारी, कार्यालय प्रमुख, कर्मचारी आदि मौजूद थे।

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Written by
Yudhishthir Mahato

युधिष्ठिर महतो | पत्रकार एवं लेखक युधिष्ठिर महतो वर्ष 2017 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय पत्रकार, लेखक, गीतकार और जनसंपर्क पेशेवर हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत रिपोर्टर के रूप में की और समाचार पत्रों, न्यूज़ पोर्टलों तथा टीवी चैनलों में काम करते हुए मीडिया के विभिन्न प्रारूपों में अनुभव हासिल किया। वे झारखंड क्रांति खबर में उप-संपादक के रूप में भी कार्य कर चुके हैं। वर्तमान में वे पत्रकारिता के साथ जनसंपर्क एवं संचार कार्य से जुड़े हैं और धनबाद तथा झारखंड से संबंधित सामाजिक, राजनीतिक, प्रशासनिक एवं जनसरोकार के मुद्दों पर लगातार लिखते हैं। Aaryaa News पर उनके नाम से प्रकाशित खबरों में स्थानीय घटनाक्रम से लेकर राज्य की महत्वपूर्ण राजनीतिक एवं सामाजिक गतिविधियां शामिल हैं। उन्होंने बिनोद बिहारी महतो कोयलांचल विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एम.ए. किया है। पत्रकारिता के साथ उन्हें साहित्य और रचनात्मक लेखन में भी विशेष रुचि है। वे हिंदी और खोरठा में गीत एवं कविताएं लिखते हैं और उनके लिखे कई गीत विभिन्न ऑडियो प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हैं। पत्रकारिता, जनसंपर्क और रचनात्मक लेखन—इन तीनों क्षेत्रों में सक्रियता युधिष्ठिर महतो की पेशेवर पहचान को अलग आयाम देती है।

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