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राँची, गुमला और लातेहार सहित झारखंड में कड़ाके की ठंड

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झारखंड । राँची समेत झारखंड के ज्यादातर जिलों में कड़ाके की ठंड पड़ रही है। दिन और रात के तापमान में उतार-चढ़ाव जारी है। सर्द हवाओं ने जन जीवन को बुरी तरह से प्रभावित किया है। बेघरों को रात काटनी मुश्किल हो रही है। हालांकि जिला प्रशासन के स्तर पर जगह-जगह अलाव की व्यवस्था की गई है। राज्य के ज्यादातर हिस्सों में दिन का पारा सामान्य के आसपास रहा है। लेकिन रात होते ही 1 से 3 डिग्री तक न्यूनतम तापमान में कमी आई है, जिसकी वजह से सिहरन महसूस हो रही है।

कुल नौ जिलों में न्यूनतम पर 10 डिग्री के नीचे

मौसम केंद्र, रांची की ओर से 18 जनवरी को जारी रिपोर्ट के मुताबिक राॅंची का न्यूनतम तापमान 6 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड हुआ है। जो पूरे राज्य में सबसे कम रहा है। हालांकि 17 दिसंबर की तुलना में 24 घंटे के भीतर रांची के न्यूनतम तापमान में 0.7 डिग्री का इजाफा हुआ है। इसके अलावा डाल्टनगंज, बोकारो, गुमला, हजारीबाग, खूंटी, लातेहार, लोहरदगा और सिमडेगा में न्यूनतम पारा 10 डिग्री से नीचे रहा है। राँची के बाद गुमला में सबसे कम पारा 6.6 डिग्री रिकॉर्ड हुआ है। वहीं, लातेहार में न्यूनतम पारा 7.7 डिग्री रहा है।

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Written by
Yudhishthir Mahato

युधिष्ठिर महतो | पत्रकार एवं लेखक युधिष्ठिर महतो वर्ष 2017 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय पत्रकार, लेखक, गीतकार और जनसंपर्क पेशेवर हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत रिपोर्टर के रूप में की और समाचार पत्रों, न्यूज़ पोर्टलों तथा टीवी चैनलों में काम करते हुए मीडिया के विभिन्न प्रारूपों में अनुभव हासिल किया। वे झारखंड क्रांति खबर में उप-संपादक के रूप में भी कार्य कर चुके हैं। वर्तमान में वे पत्रकारिता के साथ जनसंपर्क एवं संचार कार्य से जुड़े हैं और धनबाद तथा झारखंड से संबंधित सामाजिक, राजनीतिक, प्रशासनिक एवं जनसरोकार के मुद्दों पर लगातार लिखते हैं। Aaryaa News पर उनके नाम से प्रकाशित खबरों में स्थानीय घटनाक्रम से लेकर राज्य की महत्वपूर्ण राजनीतिक एवं सामाजिक गतिविधियां शामिल हैं। उन्होंने बिनोद बिहारी महतो कोयलांचल विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एम.ए. किया है। पत्रकारिता के साथ उन्हें साहित्य और रचनात्मक लेखन में भी विशेष रुचि है। वे हिंदी और खोरठा में गीत एवं कविताएं लिखते हैं और उनके लिखे कई गीत विभिन्न ऑडियो प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हैं। पत्रकारिता, जनसंपर्क और रचनात्मक लेखन—इन तीनों क्षेत्रों में सक्रियता युधिष्ठिर महतो की पेशेवर पहचान को अलग आयाम देती है।

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