बड़की बौआ। प्रति वर्ष की भांति इस वर्ष भी हर्षोल्लास के साथ बड़की बौआ में चड़क पूजा मनाया गया।पीढ़ियों से चली आ रहीं यह धार्मिक परंपरा आज के इस आधुनिक युग में भी जीवंत हैं।यह पर्व लोगों की आस्था, विश्वास और मान्यताओं से जुड़ा हुआ हैं।यह हमारी भारतीय संस्कृति का अंग हैं।इस वर्ष लगभग 29 भोक्ताओं ने पर्व को किया एवं शरीर में कीलें चुभाकर, पीठ में हुक लगाकर ऊंचे खंभे (चड़क पेड़) पर घूमकर तपस्या और शिव के प्रति अटूट आस्था का प्रदर्शन किया।जबकि,पूजा में मेला का आयोजन भी किया गया।

चड़क पूजा समिति ने भोक्ताओं को पगड़ी पहनाकर किया सम्मानित
चड़क पूजा समिति द्वारा भोक्ताओं एवं पूजा में सहयोग करने वाले ग्रामीण पुरोहित सहित गणमान्य जनों को पगड़ी पहनाकर सम्मानित किया गया।वहीं,मुखिया भीम लाल रजक भी मौके पर सम्मानित किए गए।
चड़क पूजा भगवान शिव से जुड़ा एक सनातन लोक उत्सव हैं।जिसे करने से भगवान शिव सभी की मनोकामना पूरी करते हैं।ऐसी श्रद्धा – भक्ति लोगों में हैं।चड़क पूजा मुख्यतः पश्चिम बंगाल एवं झारखंड में चैत्र संक्रांति (14-15 अप्रैल) को मनाया जाता हैं।यह भगवान शिव की पूजा के लिए समर्पित है।
चड़क पूजा को सफल बनाने में समाजसेवी टेकलाल महतो,भीम नारायण सिंह,मुखिया भीम लाल रजक,शिव लाल महतो,ग्रामीण पुरोहित पवन पांडेय,लखन कुम्हार,गोपाल महतो,गंझू महतो,कामेश्वर महतो,नुनुलाल कुम्हार,प्रदीप सिंह,गंगाधर कुम्हार,त्रिपुरारी कुंभकार,संतोष रवानी,हुलास कुम्हार सहित समिति सदस्यों एवं ग्रामीणों का सराहनीय योगदान रहा।
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