नई दिल्ली: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा है कि स्कूली शिक्षा प्रणाली को सशक्त और गुणवत्तापूर्ण बनाने के लिए केंद्र और राज्य सरकारें समान रूप से उत्तरदायी और भागीदार हैं। वे नई दिल्ली के आईसीएआर राष्ट्रीय कृषि विज्ञान परिसर (NASC) में आयोजित राज्य एवं केंद्र शासित प्रदेशों के शिक्षा मंत्रियों के दो दिवसीय सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहे थे। यह सम्मेलन शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग (DoSEL) की केंद्र प्रायोजित योजनाओं की समीक्षा के उद्देश्य से आयोजित किया गया था।
अपने अध्यक्षीय संबोधन में शिक्षा मंत्री ने कहा कि यह सम्मेलन केंद्र और राज्यों के बीच आपसी सहयोग बढ़ाने, एक-दूसरे के बेहतरीन अनुभवों (Best Practices) को साझा करने और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के लक्ष्यों को तेजी से लागू करने का एक महत्वपूर्ण मंच है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सम्मेलन की चर्चाएं एक समावेशी, भविष्य-उन्मुख और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रणाली के निर्माण के सामूहिक संकल्प को बल प्रदान करेंगी तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में होने वाली आगामी ‘प्रगति’ समीक्षा बैठक के लिए आधार तैयार करेंगी।
2047 के ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य पर जोर
शिक्षा मंत्री ने समग्र शिक्षा, पीएम श्री, निपुण भारत, पीएम पोषण और उल्लास जैसी प्रमुख योजनाओं के माध्यम से स्कूली शिक्षा में हुए सुधारों को रेखांकित किया। उन्होंने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से आह्वान किया कि वे:
- बुनियादी साक्षरता और संख्या ज्ञान (FLN) को मजबूत करें।
- शिक्षकों के सशक्तीकरण और प्रशिक्षण पर ध्यान दें।
- प्रौद्योगिकी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का अधिकतम लाभ उठाएं।
- मातृभाषा और बहुभाषावाद को बढ़ावा दें, ताकि बच्चों के सीखने के स्तर में सुधार हो सके।
इन प्रयासों का मुख्य उद्देश्य ‘विकसित भारत 2047’ के विजन के तहत प्रत्येक छात्र का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित करना है।
सहयोग और समान अवसर पर बल
सम्मेलन को संबोधित करते हुए शिक्षा, कौशल विकास और उद्यमिता राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने भी शैक्षिक परिणामों में सुधार के लिए केंद्र और राज्यों के बीच मजबूत तालमेल को आवश्यक बताया।
सम्मेलन के प्रथम दिन प्रशासनिक और तकनीकी पहलुओं पर विस्तृत प्रस्तुतियां दी गईं:
- DoSEL के अतिरिक्त सचिव धीरज साहू ने समग्र शिक्षा और प्रगति ढांचे के तहत महत्वपूर्ण विषयों पर विचार प्रस्तुत किए।
- उप महानिदेशक डॉ. पंकज केपी श्रेयस्कर ने राज्यों में शैक्षणिक संकेतकों की वर्तमान स्थिति का ब्योरा दिया।
- DoSEL की संयुक्त सचिव डॉ. अमरप्रीत दुग्गल और आर्थिक सलाहकार ए. श्रीजा सहित विभिन्न राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी भी इस अवसर पर मौजूद रहे।
इस दो दिवसीय सम्मेलन का मूल ध्येय एक ऐसी न्यायसंगत और समावेशी शिक्षा प्रणाली स्थापित करना है, जो देश के हर बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की पहुंच सुनिश्चित कर सके।
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