Home झारखण्ड चंपाई सोरेन की नाराजगी से बीजेपी में बढ़ी सियासी खींचतान।
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चंपाई सोरेन की नाराजगी से बीजेपी में बढ़ी सियासी खींचतान।

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रांची । झारखंड में हो रहे नगर निकाय चुनाव ने न केवल सत्तारूढ़ गठबंधन में, बल्कि राजनीतिक दलों के भीतर भी दरार को उजागर कर दिया है। एक ओर धनबाद में झरिया से बीजेपी विधायक रागिनी सिंह के पति ने पार्टी समर्थित उम्मीदवार के खिलाफ मैदान में उतरकर बगावत का बिगुल फूंक दिया है, वहीं दूसरी ओर पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन भी पार्टी से नाराज चल रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, चंपाई सोरेन उम्मीदवारों के चयन को लेकर हुई बैठकों और रायशुमारी से खुद को अलग रखे जाने से असंतुष्ट हैं। उनका कहना है कि पार्टी की ओर से उन्हें किसी बैठक या रणनीति चर्चा की जानकारी नहीं दी जाती। उन्होंने संकेत दिए कि इसके पीछे संगठन के कुछ प्रभावशाली लोग हैं जो नहीं चाहते कि वे सक्रिय भूमिका निभाएं।

घाटशिला विधानसभा उपचुनाव में चंपाई सोरेन के बेटे बाबूलाल सोरेन की करारी हार ने पहले ही उनके राजनीतिक प्रभाव को कमजोर किया है।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि बीजेपी में शामिल होने के बाद चंपाई अपनी “स्वतंत्र शैली की राजनीति” को संगठन के ढांचे में ढाल नहीं पाए। पार्टी के भीतर अनुशासन और निर्णय-प्रक्रिया पर उनका प्रभाव सीमित हो गया है।
बीजेपी नेताओं का पलटवार
आदित्यपुर नगर निगम चुनाव के प्रभारी शैलेंद्र सिंह ने चंपाई के आरोपों को नकारते हुए कहा कि उन्हें और उनके पीए को सभी बैठकों की जानकारी दी जाती है, लेकिन वे प्रायः उपस्थित नहीं होते। शैलेंद्र सिंह के अनुसार, चंपाई चाहते थे कि किसी एक प्रत्याशी को आधिकारिक समर्थन न दिया जाए, जबकि पार्टी ने सर्वसम्मति से हर निकाय में एक प्रत्याशी को समर्थन देने का फैसला किया था।

अपने समर्थकों को मैदान में उतारा
विवाद तब और गहरा गया जब यह जानकारी सामने आई कि चंपाई सोरेन ने आदित्यपुर नगर निगम और सरायकेला नगर पंचायत में अपने समर्थकों को मैदान में उतार दिया है।
आदित्यपुर में चंपाई समर्थक सुनीता लियांगी और सरायकेला में सानंद आचार्या ने पार्टी द्वारा घोषित प्रत्याशियों के खिलाफ चुनाव लड़ा है।

इस कदम से पार्टी के भीतर यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या चंपाई सोरेन अब बीजेपी के भीतर अपना अलग राजनीतिक प्रभाव क्षेत्र तैयार कर रहे हैं।

राजनीतिक भविष्य पर सवाल
एक समय ‘कोल्हान टाइगर’ कहलाने वाले चंपाई सोरेन का राजनीतिक कद अब हाशिए पर बताया जा रहा है। विधानसभा सत्रों में उनकी अनुपस्थिति और चुप्पी ने भी उनके प्रभाव को कम किया है।

2024 के विधानसभा चुनाव से पहले यह नाराजगी बीजेपी के लिए एक चुनौती बन सकती है, खासकर तब जब चंपाई को पार्टी ने कभी बड़ा आदिवासी चेहरा बताकर शामिल किया था।

नगर निकाय चुनाव के बहाने चंपाई सोरेन और बीजेपी के बीच की दूरी अब खुलकर सामने आ गई है, जो आगे पार्टी के भीतर और सियासी हलचल बढ़ा सकती है।

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Written by
Yudhishthir Mahato

Yudhishthir Mahato is a journalist. He has been doing journalism for the past several years. He started journalism as a reporter in the year 2017. He also worked for newspapers, news portals and TV channels. Currently, along with journalism, he also does public relations work. He has done M.A in Mass Communication from Binod Bihari Mahato Koyalanchal University. He has been honored by many organizations. Apart from this, he also writes songs and poems.

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