रांची में राज्यस्तरीय सम्मेलन “हर बच्चे को परिवार का स्नेह” पर जोर।
रांची : झारखंड में जरूरतमंद बच्चों को संस्थागत जीवन से बाहर निकालकर परिवार जैसा वातावरण देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, झारखंड राज्य बाल संरक्षण संस्था के मार्गदर्शन में बाल कल्याण संघ एवं मिरेकल इंडिया फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में राजधानी रांची के होटल कैपिटल हिल में “Alternative Care Service for Children (विशेष फोकस: Foster Care)” विषय पर एक दिवसीय राज्यस्तरीय सम्मेलन का आयोजन किया गया।
सम्मेलन में राज्य के विभिन्न जिलों से जिला बाल संरक्षण इकाई , बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष – सदस्य, सामाजिक कार्यकर्ता एवं विशेषज्ञों सहित बड़ी संख्या में प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के निदेशक शशि प्रकाश झा ने कहा कि “पद और प्रतिष्ठा से नहीं, बल्कि समर्पित कार्य से पहचान बनती है।” उन्होंने CWC एवं CCI से जुड़े सभी पदाधिकारियों से अपील किया कि वे बच्चों के प्रति अभिभावक जैसी संवेदनशीलता अपनाएं और हर निर्णय में बच्चों के सर्वोत्तम हित को प्राथमिकता दें।
झारखंड राज्य बाल संरक्षण संस्था के निदेशक सह सदस्य सचिव विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि “हर बच्चे को परिवार का प्यार मिलना चाहिए, यही हमारा संकल्प है।” उन्होंने बताया कि मिशन वात्सल्य के अंतर्गत राज्य में 9000 बच्चों को स्पॉन्सरशिप योजना से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया था, जिसमें अब तक 6100 बच्चों को लाभ मिल चुका है। वहीं फोस्टर केयर के लक्ष्य 250 के मुकाबले अब तक 38 बच्चों को पारिवारिक देखभाल से जोड़ा गया है। उन्होंने इसे एक सकारात्मक शुरुआत बताते हुए इसमें और तेजी लाने पर बल दिया। साथ ही आफ्टर केयर योजना के तहत 12 बच्चों को लाभान्वित किया जा चुका है।
माध्यमिक शिक्षा निदेशक राजेश प्रसाद ने कहा कि समाज में लगभग 26 प्रकार के ऐसे बच्चे हैं जैसे एकल, अनाथ, बाल श्रमिक आदि जो विशेष संरक्षण की आवश्यकता रखते हैं। उन्होंने कहा कि “इन बच्चों को सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन देना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।” उन्होंने ग्रामीण समाज में प्रचलित पारिवारिक सहयोग की परंपरा को मजबूत करने पर जोर दिया।
सम्मेलन के प्रमुख रिसोर्स पर्सन एवं पूर्व CARA निदेशक तथा पूर्व NCPCR रजिस्ट्रार जगन्नाथ पति ने कहा कि मिशन वात्सल्य को ‘मिशन मोड’ में लागू करने का उद्देश्य यह है कि हर स्तर पर तेज, समन्वित और प्रभावी कार्य हो सके। उन्होंने बताया कि देश में लगभग 5000 चाइल्ड केयर इंस्टीट्यूशन हैं, जहां करीब 4 लाख बच्चे रह रहे हैं। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि लगभग 700 बच्चों को फोस्टर केयर के माध्यम से दत्तक ग्रहण से जोड़ा गया है, जो इस व्यवस्था की संभावनाओं को दर्शाता है।
महिला एवं बाल विकास विभाग के उप सचिव विकास कुमार ने बताया कि राज्य में अब तक 210 संभावित फोस्टर परिवारों की पहचान की जा चुकी है। इसके लिय सरकार ओर विभाग प्राथमिकता के साथ कार्य कर रही है और पंचायत प्रतिनिधि से लेकर हर एक वर्ग तक इसकी जागरूकता करने हेतु कार्य किया जा रहा है,उन्होंने कहा कि “इस संख्या को तेजी से बढ़ाने की जरूरत है, ताकि संस्थाओं में रह रहे अधिक से अधिक बच्चों को पारिवारिक माहौल मिल सके।”
बाल कल्याण संघ के संस्थापक संजय मिश्रा ने कहा कि “फोस्टर केयर जैसी महत्वपूर्ण व्यवस्था के प्रति अभी भी समाज में पर्याप्त जागरूकता नहीं है।” उन्होंने जोर देकर कहा कि इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा मिशन वात्सल्य के तहत डिजिटल पोर्टल, रियल-टाइम मॉनिटरिंग और गैर-संस्थागत देखभाल को बढ़ावा दिया जा रहा है। वर्ष 2024-25 में देशभर में लगभग 1.7 लाख बच्चों को ऐसी सेवाओं का लाभ मिलना इस दिशा में सकारात्मक संकेत है।
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