Home झारखण्ड बाबा दिशाेम गुरु का निधन न सिर्फ आदिवासी बल्कि पूरे भारत के लिए अत्यंत पीड़ादायक – आकाश रवानी
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बाबा दिशाेम गुरु का निधन न सिर्फ आदिवासी बल्कि पूरे भारत के लिए अत्यंत पीड़ादायक – आकाश रवानी

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धनबाद । झारखण्ड अलग राज्य के जनक बाबा दिशाेम गुरु का निधन न सिर्फ आदिवासी बल्कि पूरे भारत के लिए अत्यंत पीड़ा दायक है।आज एक युग का अंत हो गया।उक्त बातें झामुमो महानगर समिति धनबाद जिला प्रवक्ता आकाश रवानी ने कही। उन्होंने बयान जारी कर कहा कि आज का दिन झारखंड के इतिहास का सबसे मार्मिक दिन है। आज के दिन हम सभी को, झारखण्ड के जनक आदरणीय दिशोम गुरु शिबू सोरेन हम सभी को छोड़कर इस दुनिया से चले गए।
न सिर्फ झामुमो परिवार बल्कि पूरा झारखण्ड प्रदेश के साथ सारा देश आज उन्हें नम आंखों से श्रद्धांजलि दे रहा है। महाजनी प्रथा के खिलाफ लड़कर वंचित समुदाय में हौसला को बढ़ाने में सबसे बड़ा योगदान रहा, धनकटनी आंदोलन असमानता पर समानता का प्रहार वंचित समाज के लिए सार्थक साबित हुआ, निश्चित रूप से सबसे बड़े आंदोलन झारखण्ड अलग राज्य को इनके नेतृत्व में तेज धार मिला। गुरुजी के अथक प्रयास से आज झारखंड की भोली भाली जनता को झारखंड जैसा खुशहाल राज्य मिल पाया हैं। बाबा दिशाेम गुरुजी का निधन झारखंड के एक युग का अंत हो गया है। जिसकी भरपाई अब कोई भी नहीं कर पाएगा।काफी दिनों से उनकी शारीरिक अवस्था खराब थी और वह अस्पताल में इलाजरत थे। इस दौरान दिल्ली में आज सुबह उन्होंने अंतिम सांस ली।

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Written by
Yudhishthir Mahato

युधिष्ठिर महतो | पत्रकार एवं लेखक युधिष्ठिर महतो वर्ष 2017 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय पत्रकार, लेखक, गीतकार और जनसंपर्क पेशेवर हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत रिपोर्टर के रूप में की और समाचार पत्रों, न्यूज़ पोर्टलों तथा टीवी चैनलों में काम करते हुए मीडिया के विभिन्न प्रारूपों में अनुभव हासिल किया। वे झारखंड क्रांति खबर में उप-संपादक के रूप में भी कार्य कर चुके हैं। वर्तमान में वे पत्रकारिता के साथ जनसंपर्क एवं संचार कार्य से जुड़े हैं और धनबाद तथा झारखंड से संबंधित सामाजिक, राजनीतिक, प्रशासनिक एवं जनसरोकार के मुद्दों पर लगातार लिखते हैं। Aaryaa News पर उनके नाम से प्रकाशित खबरों में स्थानीय घटनाक्रम से लेकर राज्य की महत्वपूर्ण राजनीतिक एवं सामाजिक गतिविधियां शामिल हैं। उन्होंने बिनोद बिहारी महतो कोयलांचल विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एम.ए. किया है। पत्रकारिता के साथ उन्हें साहित्य और रचनात्मक लेखन में भी विशेष रुचि है। वे हिंदी और खोरठा में गीत एवं कविताएं लिखते हैं और उनके लिखे कई गीत विभिन्न ऑडियो प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हैं। पत्रकारिता, जनसंपर्क और रचनात्मक लेखन—इन तीनों क्षेत्रों में सक्रियता युधिष्ठिर महतो की पेशेवर पहचान को अलग आयाम देती है।

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