“पदभार ग्रहण करना सम्मान से अधिक कर्तव्य का विषय था” — राष्ट्रपति मुर्मु
“राष्ट्रपति का जीवन भारतीय लोकतंत्र की शक्ति का प्रतीक” — उपराष्ट्रपति
विशेष रिपोर्ट | नई दिल्ली
भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 25 जुलाई 2026 को अपने सफल और ऐतिहासिक कार्यकाल के चार वर्ष पूरे कर लिए हैं। इस विशेष अवसर को चिह्नित करते हुए मंगलवार, 28 जुलाई 2026 को राष्ट्रपति भवन तथा राष्ट्रपति संपदा परिसर में कई दूरगामी और जन-केंद्रित पहलों का उद्घाटन एवं शिलान्यास किया गया। साथ ही, उनके चार वर्षों के सेवाकाल और दूरदृष्टि पर आधारित पांच प्रमुख किताबों का विमोचन भी संपन्न हुआ।
जन-सुविधा और विरासत संरक्षण: मुख्य नई शुरुआत
राष्ट्रपति भवन को आम जनता के लिए और अधिक सुलभ, समावेशी तथा पर्यावरण-अनुकूल बनाने की दिशा में कई ऐतिहासिक कदम उठाए गए हैं:
- 16 भाषाओं में ई-ऑडियो गाइड: राष्ट्रपति भवन आने वाले देश-विदेश के पर्यटकों के लिए ऐप-आधारित ‘ई-ऑडियो गाइड’ सेवा शुरू की गई है। यह सुविधा हिंदी, अंग्रेजी और 14 अन्य भारतीय भाषाओं के अलावा सांकेतिक भाषा (Sign Language) में भी उपलब्ध होगी।
- ‘ई-उपहार’ (तीसरा संस्करण): राष्ट्रपति को मिले 300 चुनिंदा उपहारों की सार्वजनिक ई-नीलामी का ऐलान किया गया है। इच्छुक लोग 5 अगस्त से 5 सितंबर 2026 तक पोर्टल (
upahaar.rashtrapatibhavan.gov.in) के माध्यम से इस नीलामी में भाग ले सकते हैं। - ‘बचपन बाल परिसर’ का निर्माण: राष्ट्रपति संपदा में बच्चों के सर्वांगीण और सुरक्षित विकास के लिए विशेष प्ले जोन, ‘किलकारी’ और ‘समर्थ आंगनवाड़ी-सह-पालना’ केंद्र का उद्घाटन किया गया।
- ‘राही’ (RAAHI) ग्रीन बस सेवा: राष्ट्रपति भवन स्टाफ और स्थानीय निवासियों के लिए निःशुल्क इलेक्ट्रिक बस सेवा की शुरुआत की गई है। इस सेवा की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसका संचालन पूरी तरह से महिला चालकों और परिचालकों द्वारा किया जाएगा।
- हरित पहल एवं इन्फ्रास्ट्रक्चर: ‘नेट जीरो एनर्जी’ रणनीति के तहत नए सर्विस ब्लॉक और स्टाफ क्वार्टर पुनर्विकास की आधारशिला रखी गई। इसके अलावा राष्ट्रपति निकेतन (देहरादून) और राष्ट्रपति निलयम (सिकंदराबाद) में नई आवासीय सुविधाओं का लोकार्पण हुआ।
राष्ट्रपति के 4 वर्षों के सफर पर 5 ऐतिहासिक पुस्तकों का विमोचन
एक भव्य समारोह के दौरान भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने राष्ट्रपति के कार्यकाल के विभिन्न पड़ावों पर आधारित 5 पुस्तकों का अनावरण किया और प्रथम प्रतियां राष्ट्रपति को सौंपीं:
- राष्ट्रपति भवन : राष्ट्र का भवन (प्रथम वर्ष का लेखा-जोखा)
- सेवा और संवेदना (द्वितीय वर्ष का विवरण)
- समावेशी सहभागिता (तृतीय वर्ष पर केंद्रित)
- भारतीयता का उत्सव (चतुर्थ वर्ष की उपलब्धियां)
- अमा राष्ट्रपति – अमा गौरव (प्रतिष्ठित हस्तियों द्वारा लिखे गए लेखों का ओड़िया संकलन)
“पदभार ग्रहण करना सम्मान से अधिक कर्तव्य का विषय था” — राष्ट्रपति मुर्मु
समारोह को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि 25 जुलाई 2022 को पद संभालने का क्षण उनके लिए केवल एक सम्मान नहीं, बल्कि देश और समाज के प्रति एक बड़ी जिम्मेदारी थी।
उन्होंने रेखांकित किया कि राष्ट्रपति भवन को औपनिवेशिक छाप से मुक्त कर भारतीय संस्कृति, लोकतांत्रिक मूल्यों और राष्ट्रीय आदर्शों का जीवंत केंद्र बनाने का निरंतर प्रयास किया गया है। राष्ट्रपति ने विशेष रूप से युवाओं को नैतिक मूल्यों से जुड़ने, महिलाओं को स्वावलंबी बनने और जनजातीय समाज को अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को सहेजते हुए विकास की मुख्यधारा में शामिल होने का आह्वान किया।
“भारतीय लोकतंत्र की समावेशी शक्ति का प्रतीक है राष्ट्रपति का जीवन” — उपराष्ट्रपति
उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने राष्ट्रपति मुर्मु की निष्ठा और संवैधानिक मूल्यों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता की सराहना की। उन्होंने कहा कि ओडिशा के एक सुदूर जनजातीय गांव से लेकर देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक का राष्ट्रपति मुर्मु का सफर भारतीय लोकतंत्र की असल ताकत को दर्शाता है।
उपराष्ट्रपति ने राष्ट्रपति भवन परिसर को आम जनता के लिए खोलने (जैसे अमृत उद्यान, राष्ट्रपति निकेतन), दिव्यांगजनों के लिए सुगम बनाने और संथाली भाषा (ओल चिकी लिपि) में भारत के संविधान के प्रकाशन जैसी ऐतिहासिक पहलों का विशेष उल्लेख करते हुए इसे राष्ट्रीय गौरव का विषय बताया।
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