नमस्ते योजना से बदली अजय कुमार की किस्मत: सीवर सफाई से बने ‘स्वच्छता उद्यमी’, गाजियाबाद में पेश की सफलता की मिसाल
गाजियाबाद : वित्तीय सहायता, मशीनीकरण और अटूट दृढ़ संकल्प के बल पर गाजियाबाद के 39 वर्षीय स्वच्छता कर्मी अजय कुमार ने अपने वर्षों के व्यावहारिक अनुभव को एक स्थायी और सम्मानजनक आजीविका में बदल दिया है। केंद्र सरकार की ‘नमस्ते’ योजना के स्वच्छता उद्यमी घटक (SUY) से मिले सहयोग ने न केवल अजय की आय बढ़ाई है, बल्कि उनके परिवार के लिए एक सुरक्षित और आत्मनिर्भर भविष्य का मार्ग भी प्रशस्त किया है।
आर्थिक तंगी और जिम्मेदारियों का बोझ
गाजियाबाद के मोहन नगर स्थित राजीव कॉलोनी के निवासी अजय कुमार (अनुसूचित जाति-वाल्मीकि समुदाय) बचपन से ही आर्थिक विषमताओं से जूझ रहे थे। परिवार की कमजोर आर्थिक स्थिति के कारण वे केवल आठवीं कक्षा तक ही पढ़ाई कर सके और कम उम्र में ही उन्हें परिवार की जिम्मेदारी संभालनी पड़ी।
वे वर्षों से सीवर और सेप्टिक टैंक सफाई के जोखिम भरे काम से जुड़े थे और वर्तमान में नगर निगम गाजियाबाद के अंतर्गत मोहन नगर क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
अजय के परिवार में उनकी पत्नी (गृहिणी), तीन बेटियां (13 वर्ष, 11 वर्ष और 3 वर्ष) और गंभीर रूप से बीमार मां हैं, जिन्हें नियमित डायलिसिस की आवश्यकता होती है। परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य होने के कारण सीमित आय, तकनीकी उपकरणों का अभाव और लोन तक पहुंच न होना उनके व्यवसाय और जीवनस्तर के विस्तार में सबसे बड़ी बाधा बना हुआ था।
‘नमस्ते-SUY’ योजना बनी टर्निंग प्वाइंट
अजय के जीवन में निर्णायक बदलाव सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय (केंद्र सरकार) की ‘नमस्ते’ योजना के अंतर्गत स्वच्छता उद्यमी योजना (SUY) से आया। 11 अक्टूबर 2021 को उन्हें मशीनीकृत स्वच्छता उपकरण (ट्रैक्टर-कम-सीवर सक्शन मशीन) खरीदने के लिए अग्रिम पूंजीगत सब्सिडी स्वीकृत की गई।
- कुल परियोजना लागत: ₹11,34,000
- अग्रिम पूंजीगत सब्सिडी: ₹4,08,500
- स्वीकृत ऋण राशि: ₹7,25,500
- मासिक किस्त (EMI): ₹11,460
- वर्तमान शेष ऋण: ₹1,03,000
मशीनीकृत सक्शन मशीन मिलने से मोहन नगर क्षेत्र में नगर निगम के अंतर्गत उनके काम की दक्षता, सुरक्षा और पहुंच में अभूतपूर्व सुधार आया।
आय में उछाल और परिवार की खुशहाली
उपकरणों के मशीनीकरण के बाद अजय की मासिक आय बढ़कर ₹30,000 से ₹35,000 हो गई है। प्रति माह लोन की किस्त और परिचालन खर्च चुकाने के बाद भी वे हर महीने ₹10,000 से ₹20,000 की बचत कर पा रहे हैं।
इस बढ़ी हुई आय से अब अजय अपनी बेटियों की बेहतर पढ़ाई (बड़ी बेटी कक्षा 4 और मंझली बेटी कक्षा 3 में) का खर्च उठाने के साथ-साथ अपनी मां का नियमित डायलिसिस और इलाज बिना किसी आर्थिक तनाव के करवा रहे हैं।
अजय कुमार कहते हैं:
“बेहतर आजीविका के अवसरों से अब मैं अपने परिवार का सहयोग करने, अपनी बेटियों को अच्छी शिक्षा देने और अपनी मां की देखभाल पूरी गरिमा और आत्मविश्वास के साथ करने में सक्षम हुआ हूं।”
सशक्तिकरण और गरिमा की मिसाल
अजय कुमार की यह सफलता दर्शाती है कि यदि स्वच्छता कर्मियों को सही समय पर संस्थागत वित्तीय सहायता और आधुनिक उपकरण उपलब्ध कराए जाएं, तो वे जोखिम भरे काम छोड़कर सफल स्वरोजगार स्थापित कर सकते हैं। ‘नमस्ते-SUY’ पहल स्वच्छता कर्मियों के मशीनीकरण, गरिमा, आजीविका सुधार और सामाजिक सशक्तिकरण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।
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