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अहमदाबाद के राजू की प्रेरणादायक कहानी: नशे की लत को हराकर कैसे पाई नई ज़िंदगी और सफलता

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प्रेरणादायक : सही समय पर इलाज और इच्छाशक्ति से जीती जंग, अहमदाबाद के 23 वर्षीय राजू ने नशे को हराकर हासिल की नई ज़िंदगी

अहमदाबाद: नशे की लत न केवल किसी व्यक्ति के शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य को खोखला करती है, बल्कि उसके पारिवारिक संबंधों, रोजगार और सामाजिक प्रतिष्ठा को भी छिन्न-भिन्न कर देती है। लेकिन अगर समय पर उचित इलाज, काउंसलिंग और निरंतर पुनर्वास (रिहैबिलिटेशन) का सहारा मिले, तो अंधकारमय जीवन में भी उम्मीद की नई किरण जाग सकती है। इसका जीवंत और प्रेरणादायक उदाहरण हैं गुजरात के अहमदाबाद जिले के 23 वर्षीय राजू (बदला हुआ नाम)।

नशे के खतरनाक चक्रव्यूह में फंसे राजू ने ‘गुजरात केलावणी ट्रस्ट’ द्वारा संचालित ‘नया जीवन-आईआरसीए’ (Integrated Rehabilitation Centre for Addicts) में उपचार और काउंसलिंग प्राप्त कर न सिर्फ नशामुक्त जीवन अपनाया, बल्कि आज वे पूर्णकालिक नौकरी के साथ एक स्थिर और आत्मनिर्भर जीवन जी रहे हैं।

अभाव, अकेलापन और भटकाव भरा दौर

अनुसूचित जाति समुदाय से आने वाले और इंटरमीडिएट/डिप्लोमा स्तर तक शिक्षित राजू का शुरुआती जीवन काफी संघर्षपूर्ण रहा। बचपन में पर्याप्त स्नेह, देखभाल और भावनात्मक जुड़ाव न मिलने के कारण वे स्वभाव से अत्यधिक संवेदनशील बन गए। कठिन पारिवारिक परिस्थितियों और अपनों के सहयोग के अभाव ने उनके भीतर अकेलेपन को गहरा कर दिया, जिससे वे धीरे-धीरे नशे की लत के शिकार हो गए।

दत्तक पिता के निधन के बाद राजू पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। लत के कारण उन्हें बेघर होना पड़ा। जब उन्होंने अपनी सगी मां के परिवार से मदद की गुहार लगाई, तो वहां से भी उन्हें अस्वीकार कर दिया गया। समाज में बदनामी, आर्थिक असुरक्षा और अकेलेपन ने उन्हें मानसिक रूप से बेहद तोड़ दिया। हालांकि, उन्होंने सुरक्षा गार्ड के रूप में काम करना शुरू किया था, लेकिन लत और अस्थिर मानसिक स्थिति के कारण वे लंबे समय तक नौकरी पर नहीं टिक सके।

24 जुलाई 2024: जीवन का निर्णायक मोड़

तमाम विपरीत परिस्थितियों और सामाजिक बहिष्कार के बावजूद राजू के भीतर लत से बाहर निकलने, पक्की नौकरी पाने, आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने और समाज में पुनः सम्मान पाने की तीव्र इच्छा थी। उनकी इस उम्मीद को सही दिशा मिली 24 जुलाई 2024 को, जब उन्हें अहमदाबाद स्थित ‘नया जीवन-आईआरसीए’ में भर्ती कराया गया।

सेंटर में राजू को व्यवस्थित और वैज्ञानिक तरीके से नशा-मुक्ति उपचार प्रदान किया गया:

  • व्यक्तिगत काउंसलिंग (Personal Counseling): मानसिक स्थिति को स्थिर करने और आत्म-विश्वास की पुनर्स्थापना के लिए।
  • पारिवारिक काउंसलिंग (Family Counseling): सामाजिक और पारिवारिक स्तर पर रिश्ते संवारने के लिए।
  • निरंतर पुनर्वास व फ़ॉलो-अप सहयोग: लत के दोबारा हावी होने (Relapse) के खतरे को टालने और समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए।

आर्थिक सुरक्षा और आत्म-विश्वास के साथ नई शुरुआत

सही उपचार, रिहैबिलिटेशन और अपनी अटूट इच्छाशक्ति के बल पर राजू ने नशे की लत पर पूरी तरह विजय पाई। आज वे न केवल पूर्ण नशामुक्त जीवन जी रहे हैं, बल्कि एक प्रतिष्ठित संस्थान में पूर्णकालिक नौकरी भी कर रहे हैं। हाल ही में उनकी कार्यकुशलता को देखते हुए उनके वेतन में वृद्धि की गई है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है और उनका खोया हुआ आत्मविश्वास लौट आया है।

समाज के लिए एक नई नज़ीर

राजू का यह सफर इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि नशे की लत कोई अंतिम पड़ाव नहीं है। यदि सही समय पर चिकित्सा, काउंसलिंग, पुनर्वास और परिवार का निरंतर सहयोग मिले, तो अत्यंत कठिन परिस्थितियों में फंसा व्यक्ति भी न सिर्फ नशे से मुक्त हो सकता है, बल्कि समाज में सम्मानजनक और आत्मनिर्भर जीवन भी पुनर्स्थापित कर सकता है।

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Written by
Yudhishthir Mahato

युधिष्ठिर महतो | पत्रकार एवं लेखक युधिष्ठिर महतो वर्ष 2017 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय पत्रकार, लेखक, गीतकार और जनसंपर्क पेशेवर हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत रिपोर्टर के रूप में की और समाचार पत्रों, न्यूज़ पोर्टलों तथा टीवी चैनलों में काम करते हुए मीडिया के विभिन्न प्रारूपों में अनुभव हासिल किया। वे झारखंड क्रांति खबर में उप-संपादक के रूप में भी कार्य कर चुके हैं। वर्तमान में वे पत्रकारिता के साथ जनसंपर्क एवं संचार कार्य से जुड़े हैं और धनबाद तथा झारखंड से संबंधित सामाजिक, राजनीतिक, प्रशासनिक एवं जनसरोकार के मुद्दों पर लगातार लिखते हैं। Aaryaa News पर उनके नाम से प्रकाशित खबरों में स्थानीय घटनाक्रम से लेकर राज्य की महत्वपूर्ण राजनीतिक एवं सामाजिक गतिविधियां शामिल हैं। उन्होंने बिनोद बिहारी महतो कोयलांचल विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एम.ए. किया है। पत्रकारिता के साथ उन्हें साहित्य और रचनात्मक लेखन में भी विशेष रुचि है। वे हिंदी और खोरठा में गीत एवं कविताएं लिखते हैं और उनके लिखे कई गीत विभिन्न ऑडियो प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हैं। पत्रकारिता, जनसंपर्क और रचनात्मक लेखन—इन तीनों क्षेत्रों में सक्रियता युधिष्ठिर महतो की पेशेवर पहचान को अलग आयाम देती है।

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