धनबाद । महुदा थाना क्षेत्र में दर्ज एक कथित ट्रक चोरी का मामला पुलिस जांच में पूरी तरह उलट गया। साधारण चोरी की घटना समझे जा रहे इस मामले ने सनसनीखेज मोड़ लेते हुए सुनियोजित साजिश और अवैध स्क्रैप कारोबार का रूप ले लिया। जांच में खुलासा हुआ कि शिकायतकर्ता ने ही स्क्रैप बेचने के लिए खुद अपने ट्रक की चोरी की झूठी कहानी गढ़ी थी।
पुलिस ने मंगलवार तड़के कार्रवाई करते हुए जेएच 02 बीके 6340 नंबर के 18 चक्का ट्रेलर को अवैध लोहा स्क्रैप सहित बरामद कर वाहन मालिक को हिरासत में लिया। इस दौरान धनबाद के नव नियुक्त ग्रामीण एसपी एस. मोहम्मद याकूब ने भी थाना पहुंचकर मामले की जानकारी ली और आरोपी से पूछताछ की।
मामले में महुदा थाना कांड संख्या 15/2026 के तहत बीएनएस की विभिन्न धाराओं—303(2), 317(2), 238, 318(4), 338, 336(3) और 61(2)—में प्राथमिकी दर्ज की गई है।
जांच में ऐसे खुला राज
प्रारंभ में अविनाश कुमार राय ने अपने ट्रक की चोरी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी, लेकिन पुलिस को घटनास्थल और टोल प्लाजा के सीसीटीवी फुटेज में ट्रक के गुजरने का कोई सबूत नहीं मिला। इससे संदेह गहराया और जांच का दायरा बढ़ाया गया।
गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस ने राजगंज स्थित रेणुका इस्पात प्राइवेट लिमिटेड में छापेमारी की, जहां से ट्रक बरामद हुआ। मौके पर ट्रक से स्क्रैप आंशिक रूप से उतारा जा चुका था।
आरोपी ने स्वीकार किया जुर्म
पूछताछ में अविनाश कुमार राय ने स्वीकार किया कि उसने बाबलू शेख, निमाई महतो, राहुल और प्रकाश के साथ मिलकर स्क्रैप को अवैध रूप से बेचने की योजना बनाई थी। इसके लिए फर्जी ई-वे बिल तैयार कर “मो. इम्तियाज सन्स” के नाम पर माल खपाया गया।
जांच में यह भी सामने आया कि संबंधित फैक्ट्री के मालिक और इंचार्ज की भूमिका भी संदिग्ध है। पुलिस उनकी संलिप्तता की जांच कर रही है।
कई लोगों पर मामला दर्ज
इस मामले में अविनाश कुमार राय समेत कई आरोपियों निमाई महतो, बाबलू शेख, राहुल, प्रकाश, मो. इम्तियाज सन्स, रेणुका इस्पात प्राइवेट लिमिटेड के मालिक और इंचार्ज पर प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी कर रही है।
आरोपी जेल भेजा गया
मुख्य आरोपी और वाहन मालिक अविनाश कुमार राय को बुधवार को न्यायिक हिरासत में धनबाद जेल भेज दिया गया।
पुलिस का बयान
मामले की शिकायत दर्ज कराने वाले सहायक अवर निरीक्षक बिनोद कुमार सिंह के अनुसार, प्रारंभिक जांच में चोरी के कोई प्रमाण नहीं मिले। आवेदक के बयान में विरोधाभास पाए जाने पर गहन जांच की गई, जिसमें पूरी साजिश का खुलासा हुआ।
यह मामला न केवल पुलिस के लिए चौंकाने वाला रहा, बल्कि ट्रांसपोर्ट और स्क्रैप कारोबार में चल रही अवैध गतिविधियों की भी पोल खोलता है।
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