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“RSS राजनीतिक सत्ता नहीं चाहता” — मोहन भागवत का बयान, लक्ष्य ‘हिंदू समाज का संगठन’ 

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Mohan Bhagwat RSS not seeking political power
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RSS प्रमुख मोहन भागवत ने मेरठ में 950 खिलाड़ियों से संवाद में कहा कि संघ राजनीतिक सत्ता की चाह से नहीं चलता। उसका उद्देश्य पूरे हिंदू समाज का संगठन और व्यक्तियों का चरित्र निर्माण है। उन्होंने ‘हिंदू’ को विविधता में एकता बताया, समाज के 4 स्तंभ गिनाए और खेलों को एकता का माध्यम कहा।

“हिंदू मतलब जाति नहीं, विविधता में एकता” — RSS प्रमुख भागवत ने बताए समाज के 4 स्तंभ, युवाओं से राष्ट्रनिर्माण की अपील

“RSS राजनीतिक सत्ता नहीं चाहता” — मेरठ में 950 खिलाड़ियों से संवाद में मोहन भागवत का बड़ा बयान

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा है कि संघ किसी भी तरह की राजनीतिक सत्ता पाने की इच्छा से प्रेरित नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि RSS का एकमात्र उद्देश्य पूरे हिंदू समाज को संगठित करना और व्यक्तियों में चरित्र निर्माण को मजबूत करना है। यह बयान उन्होंने मेरठ के शताब्दी नगर स्थित ‘माधव कुंज’ में आयोजित कार्यक्रम में दिया, जहां उन्होंने करीब 950 राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों व खेल से जुड़े लोगों से बातचीत की।

भागवत ने सामाजिक एकता की अहमियत पर बात करते हुए यह भी कहा कि RSS किसी खास समूह के विरोध या प्रतिस्पर्धा में काम नहीं करता। कार्यक्रम में उन्होंने लगभग 50 मिनट तक संबोधन किया और RSS की लगभग 100 साल की यात्रा का जिक्र करते हुए युवाओं से राष्ट्रनिर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की।

भागवत के संदेश की मुख्य बातें: संगठन, चरित्र और सामाजिक एकता

कार्यक्रम में मौजूद प्रतिभागियों के मुताबिक, भागवत ने स्पष्ट कहा कि “RSS राजनीतिक सत्ता की चाह से नहीं चलता।” उनके अनुसार, संघ का लक्ष्य समाज को जोड़ना है, ताकि लोगों में मूल्य, अनुशासन और राष्ट्रीय हित के प्रति प्रतिबद्धता मजबूत हो। उन्होंने कहा कि सामाजिक एकता कमजोर पड़ने पर राष्ट्र को संकटों का सामना करना पड़ता है, इसलिए एकता और समरसता को प्राथमिकता देना जरूरी है।

उन्होंने ‘हिंदू’ शब्द की व्याख्या करते हुए कहा कि इसका मतलब जाति नहीं, बल्कि “विविधता में एकता” है। उन्होंने बताया कि पूजा-पद्धतियां और आराध्य अलग हो सकते हैं, लेकिन सांस्कृतिक आधार मूल रूप से सामंजस्य और एकता का है।

“भारत सिर्फ भूगोल नहीं”: भागवत ने किन परंपराओं का दिया संदर्भ

भागवत ने “भारत की अवधारणा” को केवल भौगोलिक सीमाओं तक सीमित नहीं माना। प्रतिभागियों के अनुसार, उन्होंने कहा कि भारत की प्रेरणा भगवान राम, भगवान कृष्ण, भगवान बुद्ध, भगवान महावीर, स्वामी विवेकानंद, स्वामी दयानंद और महात्मा गांधी जैसी परंपराओं और विचारों से आती है। यह बात उन्होंने समाज की सांस्कृतिक निरंतरता और मूल्यों के संदर्भ में कही।

समाज के ‘चार स्तंभ’: भागवत ने क्या बताया?

RSS प्रमुख ने समाज के चार स्तंभों का भी उल्लेख किया—

  1. मूल्य-आधारित संस्कार (Value inculcation)
  2. सनातन संस्कृति (Sanatan culture)
  3. धर्म की भावना (Spirit of dharma)
  4. सत्य का मूर्त रूप (Embodiment of truth)

उन्होंने दोहराया कि संघ का मिशन “व्यक्ति विकास” के जरिए पूरे हिंदू समाज का संगठन करना है, ताकि समाज भीतर से मजबूत बने।

खेलों को बताया “एकता का शक्तिशाली माध्यम”

भागवत ने खिलाड़ियों से बात करते हुए कहा कि राष्ट्रनिर्माण सिर्फ किसी एक संस्था की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि पूरे समाज की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने खेलों को “लोगों को जोड़ने का शक्तिशाली माध्यम” बताया और कहा कि खेलों में टीमवर्क, अनुशासन, एक-दूसरे का सहयोग और लक्ष्य के प्रति समर्पण जैसी बातें युवा पीढ़ी को मजबूत बनाती हैं।

कार्यक्रम में मौजूद कुछ खिलाड़ियों ने भी भागवत के संदेश को प्रेरक बताया। अर्जुन पुरस्कार विजेता पहलवान अलका तोमर ने कार्यक्रम को “भव्य” बताते हुए कहा कि RSS स्वयंसेवकों की व्यवस्थाएं बेहतर थीं और राष्ट्रहित के लिए काम करने का संदेश महत्वपूर्ण है।

पैरा खिलाड़ियों को समर्थन का संकेत

कार्यक्रम में पैरा क्रिकेट क्लब ऑफ इंडिया के खिलाड़ी सूर्य प्रताप मिश्रा (बरेली) ने कहा कि भागवत ने पैरा खिलाड़ियों के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण रखा और भरोसा दिलाया कि उन्हें हर संभव समर्थन मिलेगा ताकि वे अपने प्रदर्शन से देश का गौरव बढ़ा सकें। इस तरह के संदेश का असर खेलों में समावेशिता और बेहतर प्लेटफॉर्म की मांग को लेकर भी देखा जा रहा है।

RSS शताब्दी वर्ष और उत्तर प्रदेश दौरा: कार्यक्रम का बड़ा संदर्भ

भागवत इन दिनों उत्तर प्रदेश के दौरे पर हैं। RSS के शताब्दी समारोह के तहत देशभर में आउटरीच कार्यक्रमों की एक श्रृंखला चल रही है, उसी का हिस्सा मेरठ का यह संवाद कार्यक्रम भी है। रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने 17 और 18 फरवरी को लखनऊ में दो दिवसीय आउटरीच कार्यक्रम में हिस्सा लिया था और उससे पहले गोरखपुर भी गए थे।

लखनऊ में उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से संक्षिप्त मुलाकात की थी, जबकि दोनों उपमुख्यमंत्रियों ने भी उनसे भेंट की थी। इसके बाद वे ट्रेन से मेरठ पहुंचे और यहां खेल व उद्योग जगत के प्रतिनिधियों से बातचीत जैसे कार्यक्रमों में शामिल हुए।

आगे क्या: बुद्धिजीवियों से संवाद भी तय

रिपोर्ट के मुताबिक, मेरठ में भागवत का अगला संवाद कार्यक्रम बुद्धिजीवियों के साथ तय है, जिसमें शिक्षा, उद्योग, चिकित्सा, साहित्य, कला और व्यापार जगत के प्रतिनिधि शामिल होंगे। इस कार्यक्रम में प्रवेश आम लोगों के लिए खुला नहीं है और केवल पासधारकों को अनुमति दी गई है।

FAQs (5)

  1. मोहन भागवत ने RSS की भूमिका को लेकर क्या कहा?
    उन्होंने कहा कि RSS राजनीतिक सत्ता पाने की इच्छा से प्रेरित नहीं है और उसका उद्देश्य पूरे हिंदू समाज का संगठन तथा व्यक्तियों का चरित्र निर्माण है।
  2. भागवत ने ‘हिंदू’ शब्द का क्या अर्थ बताया?
    उन्होंने कहा कि ‘हिंदू’ का मतलब जाति नहीं, बल्कि विविधता में एकता है—पूजा और आराध्य अलग हो सकते हैं, लेकिन सांस्कृतिक आधार एकता और सामंजस्य है।
  3. मेरठ कार्यक्रम में कितने खिलाड़ियों से संवाद हुआ?
    मेरठ के माधव कुंज कार्यक्रम में भागवत ने करीब 950 राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों/खेल से जुड़े लोगों से बातचीत की।
  4. समाज के चार स्तंभ कौन-कौन से बताए गए?
    भागवत ने मूल्य-आधारित संस्कार, सनातन संस्कृति, धर्म की भावना और सत्य का मूर्त रूप—इन चार स्तंभों का उल्लेख किया।
  5. भागवत ने खेलों को क्यों महत्वपूर्ण बताया?
    उन्होंने खेलों को लोगों को जोड़ने का “शक्तिशाली माध्यम” बताया और कहा कि राष्ट्रनिर्माण पूरे समाज की जिम्मेदारी है, केवल किसी एक संगठन की नहीं।

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