Home झारखण्ड गुरुजी के अधूरे सपने को पूरा करना सभी दलों का नैतिक दायित्व : कैलाश यादव
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गुरुजी के अधूरे सपने को पूरा करना सभी दलों का नैतिक दायित्व : कैलाश यादव

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राजद ने गुरुजी शिबू सोरेन के निधन पर शोक जताया


राँची । सोमवार को झारखंड प्रदेश राजद की ओर से जेएमएम के संस्थापक झारखंड राज्य निर्माण आंदोलन के सर्वोच्च नेता संघर्ष और त्याग के प्रतिमूर्ति बाबा शिबू सोरेन के निधन पर शोक संवेदना व्यक्त किया गया।

प्रदेश प्रवक्ता कैलाश यादव ने बताया कि गुरुजी शिबू सोरेन आदिवासी के सबसे बड़े नेता थे।वे गरीब दलित पिछड़े वंचित समाज के अधिकार और रक्षा के लिए संपूर्ण जीवन संघर्ष करते रहे।जल जंगल जमीन खनिज संपदा की रक्षा के लिए सदैव लड़ते रहे। शिबू सोरेन न्याय प्रिय जननेता थे।राज्य निर्माण के दौरान झारखंड शब्द नाम देने वाले जननायक क्रांतिकारी नेता शिबू सोरेन थे।

यादव ने कहा कि राज्य के सभी राजनेताओं को संकल्प लेने की जरूरत है।श्रद्धेय शिबू सोरेन के अधूरे सपने को पूरा करना नैतिक दायित्व समझना चाहिए।

शोक संवेदना प्रदेश अध्यक्ष सह विधायक संजय सिंह यादव, मंत्री संजय प्र. यादव, विधायक दल के नेता सुरेश पासवान, विधायक नरेश सिंह ,गौतम सागर राणा, सुभाष प्रसाद यादव, आबिद अली, मनोज पांडेय, सुधीर गोप, शब्बर फातमी, प्रणय कुमार, बबलू, मनोज अग्रवाल, संतोष प्रसाद, रामकुमार यादव, साहिल साहनी, धनंजय पासवान, मिंटू सिंह सहित कई लोगों ने व्यक्त किया।

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Written by
Yudhishthir Mahato

युधिष्ठिर महतो | पत्रकार एवं लेखक युधिष्ठिर महतो वर्ष 2017 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय पत्रकार, लेखक, गीतकार और जनसंपर्क पेशेवर हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत रिपोर्टर के रूप में की और समाचार पत्रों, न्यूज़ पोर्टलों तथा टीवी चैनलों में काम करते हुए मीडिया के विभिन्न प्रारूपों में अनुभव हासिल किया। वे झारखंड क्रांति खबर में उप-संपादक के रूप में भी कार्य कर चुके हैं। वर्तमान में वे पत्रकारिता के साथ जनसंपर्क एवं संचार कार्य से जुड़े हैं और धनबाद तथा झारखंड से संबंधित सामाजिक, राजनीतिक, प्रशासनिक एवं जनसरोकार के मुद्दों पर लगातार लिखते हैं। Aaryaa News पर उनके नाम से प्रकाशित खबरों में स्थानीय घटनाक्रम से लेकर राज्य की महत्वपूर्ण राजनीतिक एवं सामाजिक गतिविधियां शामिल हैं। उन्होंने बिनोद बिहारी महतो कोयलांचल विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एम.ए. किया है। पत्रकारिता के साथ उन्हें साहित्य और रचनात्मक लेखन में भी विशेष रुचि है। वे हिंदी और खोरठा में गीत एवं कविताएं लिखते हैं और उनके लिखे कई गीत विभिन्न ऑडियो प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हैं। पत्रकारिता, जनसंपर्क और रचनात्मक लेखन—इन तीनों क्षेत्रों में सक्रियता युधिष्ठिर महतो की पेशेवर पहचान को अलग आयाम देती है।

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