Home झारखण्ड प्रोजेक्ट इंपैक्ट के तहत कार्यशाला का आयोजन, बीआरपी एवं सीआरपी को दिया गया प्रशिक्षण
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प्रोजेक्ट इंपैक्ट के तहत कार्यशाला का आयोजन, बीआरपी एवं सीआरपी को दिया गया प्रशिक्षण

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विद्यालयों में संस्थागत तरीके से हीं बदलाव संभव – उपायुक्त

प्रति दिन विद्यालयों में कराएं चेतना सत्र, बच्चों की उपस्थिति में होगी वृद्धि

विद्यालयों को सुधारने के लिए कमियों का नहीं मेहनत का करें आकलन, बेहतर होंगी सुविधाएं- उपायुक्त

धनबाद । शुक्रवार को उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी आदित्य रंजन की अध्यक्षता में जिला के सभी बीआरपी एवं सीआरपी को सीएम स्कूल ऑफ़ एक्सीलेंस (जिला स्कूल), बाबुडीह में प्रोजेक्ट इंपैक्ट के तहत प्रशिक्षण को लेकर कार्यशाला का आयोजन किया गया।

उपायुक्त आदित्य रंजन ने कहा कि शिक्षा विभाग में बीआरपी एवं सीआरपी का काफी महत्व है। सभी बीआरपी एवं सीआरपी शिक्षा के मूल उद्देश्य से नहीं भटके। आपके सहयोग से ही शिक्षा व्यवस्था में सुधार संभव है। इस दौरान उपायुक्त में सभी बीआरपी एवं सीआरपी से एक-एक कर सरकारी विद्यालयों की कमियों की जानकारी प्राप्त की।

उपायुक्त ने कहा कि प्राइवेट विद्यालयों एवं सरकारी विद्यालयों में सिर्फ एक ही अंतर है वह अंतर है कि प्राइवेट विद्यालयों में पढ़े लिखे परिवार के बच्चे पढ़ते हैं एवं सरकारी विद्यालयों में अशिक्षित परिवार एवं गरीब परिवार एवं समाज के अंतिम व्यक्ति तक के बच्चे पढ़ाई करते है। इस बात पर हमें गर्व होना चाहिए कि हम वैसे बच्चों को शिक्षित कर रहे हैं जो आर्थिक रूप से सक्षम नहीं है, साथ ही उनके परिजन शिक्षित नहीं है। ऐसे घरों में शिक्षा का दीप जलाना अपने आप में गर्व की बात होती है।

उपायुक्त ने कहा कि अक्सर अंग्रेजी मीडियम और हिंदी मीडियम को लेकर काफी चर्चाएं होती है। इसको लेकर उन्होंने कहा कि सभी विद्यालयों में हफ्ते में काम से कम एक दिन सभी शिक्षक अंग्रेजी में बातचीत करें ताकि बच्चों एवं शिक्षकों को भी अंग्रेजी में बात करने की धीरे-धीरे आदत हो। इस दौरान बीआरपी एवं सीआरपी ने विद्यालयों के पीटीएम में पेरेंट्स के नहीं आने की समस्या से उपायुक्त को रूबरू कराया। इस मामले में उपायुक्त ने कहा कि पीटीएम का एसओपी सभी शिक्षक पढ़ें और उसे पर अमल करें। पीटीएम के दौरान सभी पेरेंट्स के बच्चों की अलग से चर्चा करें। साथ ही विद्यालय में अच्छा परफॉर्मेंस करने पर बच्चों को पीटीएम के दौरान सम्मानित भी करें। इसके अलावा पेरेंट्स को भी मोबिलाइज करें तभी पीटीएम में पेरेंट्स की उपस्थिति में वृद्धि हो सकेगी।

उपायुक्त ने सभी बीआरपी एवं सीआरपी से कहा कि विद्यालयों में जांच के मकसद से न जाए बल्कि सुधार करने के उद्देश्य से जाएं। विद्यालयों में कमियों का नहीं बल्कि मेहनत का आकलन सुनिश्चित करें तभी बदलाव संभव है। बच्चों को शिक्षा के साथ-साथ अनुशासन और एक अच्छे इंसान बनाने की दिशा में कार्य करें। विद्यालयों की व्यवस्था को सुधारने में किसी एक व्यक्ति का कार्य नहीं है। इसके लिए आवश्यकता है संस्थागत तरीके से आप अपने-अपने विद्यालयों में बदलाव सुनिश्चित करें। इसके लिए अलग-अलग हाउस का गठन करें, इको क्लब का गठन करें एवं बेहतर मैनेजमेंट के साथ विद्यालय का संचालन सुनिश्चित करें।

साथ ही उन्होंने कहा कि विद्यालयों में बच्चों के रहन-सहन, अनुशासन तभी बेहतर होंगे जब शिक्षक भी उसका पालन करेंगे। साथ ही उन्होंने कहा कि प्रतिदिन चेतना सत्र अवश्य कराएं ताकि बच्चों में इसकी चर्चा हो और बच्चों की उपस्थिति की प्रतिशत में वृद्धि हो। हम सभी मिलकर विद्यालयों को सुधारेंगे। सभी स्कूल सीएम स्कूल आफ एक्सीलेंस जैसा हो यह हमारी प्राथमिकता होगी इसके लिए सभी का सहयोग अपेक्षित है।

मौके पर जिला शिक्षा पदाधिकारी अभिषेक झा, जिला शिक्षा अधीक्षक आयुष कुमार सभी बीआरपी एवं सीआरपी तथा डीएमएफटी टीम मौजूद रहें।

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Written by
Yudhishthir Mahato

युधिष्ठिर महतो | पत्रकार एवं लेखक युधिष्ठिर महतो वर्ष 2017 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय पत्रकार, लेखक, गीतकार और जनसंपर्क पेशेवर हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत रिपोर्टर के रूप में की और समाचार पत्रों, न्यूज़ पोर्टलों तथा टीवी चैनलों में काम करते हुए मीडिया के विभिन्न प्रारूपों में अनुभव हासिल किया। वे झारखंड क्रांति खबर में उप-संपादक के रूप में भी कार्य कर चुके हैं। वर्तमान में वे पत्रकारिता के साथ जनसंपर्क एवं संचार कार्य से जुड़े हैं और धनबाद तथा झारखंड से संबंधित सामाजिक, राजनीतिक, प्रशासनिक एवं जनसरोकार के मुद्दों पर लगातार लिखते हैं। Aaryaa News पर उनके नाम से प्रकाशित खबरों में स्थानीय घटनाक्रम से लेकर राज्य की महत्वपूर्ण राजनीतिक एवं सामाजिक गतिविधियां शामिल हैं। उन्होंने बिनोद बिहारी महतो कोयलांचल विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एम.ए. किया है। पत्रकारिता के साथ उन्हें साहित्य और रचनात्मक लेखन में भी विशेष रुचि है। वे हिंदी और खोरठा में गीत एवं कविताएं लिखते हैं और उनके लिखे कई गीत विभिन्न ऑडियो प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हैं। पत्रकारिता, जनसंपर्क और रचनात्मक लेखन—इन तीनों क्षेत्रों में सक्रियता युधिष्ठिर महतो की पेशेवर पहचान को अलग आयाम देती है।

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