नई दिल्ली : केंद्र सरकार के सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने पिछले तीन वित्तीय वर्षों के दौरान अनुसूचित जाति (एससी) के विद्यार्थियों की विभिन्न छात्रवृत्ति योजनाओं के तहत कुल ₹19,216.46 करोड़ की राशि वितरित की है। लोकसभा में सांसद राजा ए. के प्रश्न के लिखित उत्तर में केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार ने यह आंकड़े प्रस्तुत किए।
छात्रवृत्ति आवंटन का वर्ष-वार विवरण
वर्ष-दर-वर्ष आंकड़ों से स्पष्ट है कि एससी छात्रवृत्ति आवंटन में लगातार बढ़ोतरी हुई है:
| योजना का नाम | FY 2023-24 | FY 2024-25 | FY 2025-26 | 3 वर्षों का कुल योग |
| मैट्रिकोत्तर (Post-Matric) छात्रवृत्ति | ₹5,475.42 करोड़ | ₹5,562.26 करोड़ | ₹6,186.95 करोड़ | ₹17,224.63 करोड़ |
| प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना | ₹446.66 करोड़ | ₹460.90 करोड़ | ₹562.36 करोड़ | ₹1,469.92 करोड़ |
| उच्च स्तरीय शिक्षा योजना (TCS) | — | — | — | ₹304.29 करोड़ |
| राष्ट्रीय विदेशी छात्रवृत्ति (NOS) | — | — | — | ₹217.62 करोड़ |
| कुल वार्षिक वितरण | ₹6,094.48 करोड़ | ₹6,200.59 करोड़ | ₹6,921.39 करोड़ | ₹19,216.46 करोड़ |
प्रमुख राज्यों को प्राप्त केंद्रीय वित्तीय सहायता
- तमिलनाडु: मैट्रिकोत्तर छात्रवृत्ति में ₹713.70 करोड़ (2023-24), ₹1,032.09 करोड़ (2024-25) और ₹1,034.94 करोड़ (2025-26) प्राप्त हुए। प्री-मैट्रिक योजना में क्रमशः ₹70.56 करोड़, ₹109.45 करोड़ और ₹121.49 करोड़ आवंटित किए गए।
- महाराष्ट्र: पिछले तीन वर्षों में क्रमशः ₹1,652.98 करोड़, ₹929.92 करोड़ और ₹1,095.80 करोड़ प्राप्त हुए।
- उत्तर प्रदेश: तीन वित्तीय वर्षों में क्रमशः ₹674.83 करोड़, ₹366.02 करोड़ और ₹617.64 करोड़ जारी किए गए।
कार्यान्वयन एवं भुगतान तंत्र
- केंद्र प्रायोजित योजनाएं: मैट्रिकोत्तर और प्री-मैट्रिक योजनाएं केंद्र प्रायोजित हैं। इनमें संबंधित राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा अपना अंश जारी करने के बाद केंद्रीय पोर्टल के माध्यम से केंद्रीय हिस्सा जारी किया जाता है।
- केंद्रीय क्षेत्र की योजनाएं: राष्ट्रीय विदेशी छात्रवृत्ति (NOS) और ‘श्रेयस-एससी’ के तहत संचालित उच्च स्तरीय शिक्षा योजना केंद्रीय क्षेत्र की योजनाएं हैं। NOS के तहत विदेशों में स्थित भारतीय मिशनों को प्राधिकरण पत्र (LoA) से अग्रिम धनराशि दी जाती है, जबकि उच्च स्तरीय शिक्षा योजना में राशि सीधे अभ्यर्थियों को प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) से ट्रांसफर की जाती है। इसमें राज्य-वार कोटा तय नहीं होता।
- विलंब रोकने के उपाय: भुगतान प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए आधार-लिंक्ड बैंक खातों में डीबीटी के जरिए राशि भेजी जा रही है। इसके अलावा क्षमता निर्माण, तकनीकी सहायता, राष्ट्रीय स्तर के चिंतन शिविरों और नियमित समीक्षा बैठकों के जरिए प्रक्रियाओं को सुदृढ़ किया जा रहा है।
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