नई दिल्ली: भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने और आयात पर निर्भरता कम करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने शनिवार से महानदी अपतटीय बेसिन (Mahanadi Offshore Basin) में पहले मूल्यांकन कुएं MN-DWN-18-1-HD की ड्रिलिंग की आधिकारिक शुरुआत की जानकारी दी।
मंत्री ने इस उपलब्धि को भारत के ऊर्जा क्षेत्र में “एक नए अध्याय की शुरुआत” करार देते हुए कहा कि यह पिछले एक दशक में किए गए दूरदर्शी सुधारों का प्रतिफल है, जिन्होंने देश के अन्वेषण और उत्पादन (E&P) परिदृश्य को पूरी तरह से बदल दिया है।
विश्व स्तरीय तकनीक से खोजा जाएगा हाइड्रोकार्बन
महानदी अपतटीय बेसिन का यह कुआँ, क्षेत्र का व्यवस्थित मूल्यांकन करने के लिए प्रस्तावित चार गहरे पानी के कुओं में से पहला है। इस ड्रिलिंग कार्यक्रम में विश्व स्तरीय गहरे पानी की तकनीक का उपयोग किया जा रहा है, जिसका मुख्य उद्देश्य:
- नए हाइड्रोकार्बन संसाधनों का पता लगाना।
- देश की घरेलू उत्पादन क्षमता को सशक्त बनाना।
- भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना।
एक दशक के ऐतिहासिक नीतिगत सुधार
हरदीप सिंह पुरी ने बताया कि 2014 के बाद से सरकार ने अन्वेषण तंत्र को नया रूप देने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं:
- HELP और OALP नीति: ‘हाइड्रोकार्बन अन्वेषण एवं लाइसेंसिंग नीति’ (HELP) और ‘ओपन एकरेज लाइसेंसिंग कार्यक्रम’ (OALP) के माध्यम से नामांकन पद्धति को समाप्त कर पारदर्शी राजस्व बंटवारा लागू किया गया।
- 99% अपतटीय क्षेत्र खुले: पहले प्रतिबंधित क्षेत्रों में से लगभग 99% हिस्से को अन्वेषण के लिए खोल दिया गया है।
- सक्रिय अन्वेषण क्षेत्र: भारत के कुल सक्रिय अन्वेषण क्षेत्रों में से करीब 81% क्षेत्र 2014 के बाद आवंटित किए गए हैं, जो निवेशकों के बढ़ते विश्वास को दर्शाता है।
- भूवैज्ञानिक डेटाबेस: ‘राष्ट्रीय भूकंपीय कार्यक्रम’ और ‘राष्ट्रीय डेटा भंडार’ जैसी पहलों के माध्यम से सरकार ने दुनिया के सबसे व्यापक डेटाबेस में से एक तैयार किया है।
आंकड़े और हालिया प्रगति
| क्षेत्र / गतिविधि | विवरण / उपलब्धि |
| OALP के तहत आवंटन | 3.8 लाख वर्ग किमी में फैले 172 अन्वेषण ब्लॉक |
| कुल निवेश | 4.3 बिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक |
| वित्त वर्ष 2025-26 के प्रयास | 674 कुओं की खुदाई, 5 नई खोजें, और 7 भंडारों से उत्पादन शुरू |
“हम सिर्फ समुद्र तल में नहीं, भारत के भविष्य के लिए खुदाई कर रहे हैं”
केंद्रीय मंत्री ने सरकार की दोहरी रणनीति स्पष्ट करते हुए कहा कि एक तरफ नए संसाधनों की खोज जारी है, वहीं दूसरी तरफ उन्नत प्रौद्योगिकियों के जरिए मौजूदा क्षेत्रों से अधिकतम उत्पादन सुनिश्चित किया जा रहा है।
“आज जब हम इस पहले कुएं की खुदाई शुरू कर रहे हैं, तो हम केवल समुद्र तल में ही ड्रिलिंग नहीं कर रहे हैं, बल्कि भारत की भविष्य की ऊर्जा सुरक्षा के लिए काम कर रहे हैं। खोदा गया हर मीटर हमें आयात पर निर्भरता कम करने और ‘विकसित भारत’ के सपने को साकार करने के करीब लाता है।”
— हरदीप सिंह पुरी, केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री
उन्होंने इस उपलब्धि पर ONGC, ऑयल इंडिया लिमिटेड (OIL), हाइड्रोकार्बन महानिदेशालय (DGH) और तकनीकी भागीदारों को बधाई दी और विश्वास जताया कि यह पहल देश की दीर्घकालिक ऊर्जा आत्मनिर्भरता में मील का पत्थर साबित होगी।
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