Home झारखण्ड 31 जुलाई से 1 अगस्त तक बरवाअड्डा हवाई पट्टी के आस-पास का क्षेत्र “नो फ्लाई जोन” घोषित
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31 जुलाई से 1 अगस्त तक बरवाअड्डा हवाई पट्टी के आस-पास का क्षेत्र “नो फ्लाई जोन” घोषित

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धनबाद । उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी आदित्य रंजन ने बरवाअड्डा हवाई पट्टी के आस-पास के क्षेत्र को 31 जुलाई की सुबह 10 बजे से 1 अगस्त की संध्या 6 बजे तक नो फ्लाई जोन घोषित किया है।

इस संबंध में उपायुक्त ने कहा कि राष्ट्रपति का आई.आई.टी. आई.एस.एम. में 1 अगस्त को भ्रमण कार्यक्रम प्रस्तावित है। राष्ट्रपति का वायुमार्ग से अवतरण बरवाअड्डा हवाई प‌ट्टी निर्धारित है। उक्त के निमित्त सुरक्षा व्यवस्था के दृष्टिकोण से ड्रोन, पाराग्लाईडिंग, हॉट एयर बैलून एवं अन्य संबंधित गतिविधियों को निषेध करते हुए बरवाअड्डा हवाई पट्टी के आस-पास के क्षेत्र को “नो फ्लाई जोन” घोषित किया जाना आवश्यक है।

राष्ट्रपति के प्रस्तावित धनबाद भ्रमण कार्यकम के मद्देनजर सुरक्षा व्यवस्था के दृष्टिकोण से भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत 31 जुलाई को प्रातः 10 बजे से 1 अगस्त की संध्या 6 बजे तक बरवाअड्डा हवाई पट्टी के आस-पास के क्षेत्र को नो फ्लाई जोन घोषित किया गया है।

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Written by
Yudhishthir Mahato

युधिष्ठिर महतो | पत्रकार एवं लेखक युधिष्ठिर महतो वर्ष 2017 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय पत्रकार, लेखक, गीतकार और जनसंपर्क पेशेवर हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत रिपोर्टर के रूप में की और समाचार पत्रों, न्यूज़ पोर्टलों तथा टीवी चैनलों में काम करते हुए मीडिया के विभिन्न प्रारूपों में अनुभव हासिल किया। वे झारखंड क्रांति खबर में उप-संपादक के रूप में भी कार्य कर चुके हैं। वर्तमान में वे पत्रकारिता के साथ जनसंपर्क एवं संचार कार्य से जुड़े हैं और धनबाद तथा झारखंड से संबंधित सामाजिक, राजनीतिक, प्रशासनिक एवं जनसरोकार के मुद्दों पर लगातार लिखते हैं। Aaryaa News पर उनके नाम से प्रकाशित खबरों में स्थानीय घटनाक्रम से लेकर राज्य की महत्वपूर्ण राजनीतिक एवं सामाजिक गतिविधियां शामिल हैं। उन्होंने बिनोद बिहारी महतो कोयलांचल विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एम.ए. किया है। पत्रकारिता के साथ उन्हें साहित्य और रचनात्मक लेखन में भी विशेष रुचि है। वे हिंदी और खोरठा में गीत एवं कविताएं लिखते हैं और उनके लिखे कई गीत विभिन्न ऑडियो प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हैं। पत्रकारिता, जनसंपर्क और रचनात्मक लेखन—इन तीनों क्षेत्रों में सक्रियता युधिष्ठिर महतो की पेशेवर पहचान को अलग आयाम देती है।

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