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सहायक उपकरण के लिए 428 दिव्यांग बच्चे चिह्नित

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धनबाद : उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी आदित्य रंजन द्वारा जिले के सभी प्रखंड में 3 वर्ष से 18 वर्ष के दिव्यांग बच्चों को शिक्षा की मुख्य धारा से जोड़ने के लिए उन्हें आवश्यक सहायक उपकरण प्रदान करने के निर्देश के आलोक में जिले के विभिन्न प्रखंडों में जांच शिविर का आयोजन 25 अगस्त से 11 सितंबर 2025 तक किया गया।

इस क्रम में 25 अगस्त को पूर्वी टुंडी, 26 अगस्त को टुंडी, 28 अगस्त कलियासोल, 29 अगस्त एगारकुंड, 30 अगस्त धनबाद ग्रामीण एवं धनबाद शहरी, 1 सितंबर बलियापुर, 2 सितंबर झरिया, 8 सितंबर को गोविंदपुर, 9 सितंबर को निरसा, 10 सितंबर को बाघमारा एवं 11 सितंबर 2025 को तोपचांची में जांच शिविर का आयोजन किया गया।

जांच के पश्चात पूर्वी टुंडी में 21, टुंडी में 62, कलियासोल में 26, एगारकुंड में 26, धनबाद में 35, बलियापुर में 35, झरिया में 53,, गोविंदपुर में 42, निरसा में 51, बाघमारा में 48 तथा तोपचांची में 29 सहित 428 दिव्यांग बच्चे चिह्नित किए गए। इन बच्चों को रांची की कृत्रिम अंग निर्माण करने वाली आर्टिफिशियल लिंब कॉरपोरेशन लिमिटेड (एलिम्को) द्वारा उपकरण प्रदान किया जाएगा। वहीं शिविरों में आवश्यकतानुसार दिव्यांग बच्चों को ट्राई-साईकिल, फोल्डिंग व्हीलचेयर, स्लेट के साथ ब्रेल लिपि किट, डिजीटल हीयरिंग मशीन, टी.एल.एम. किट व अन्य सहायक उपकरण प्रदान किया गया।

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Written by
Yudhishthir Mahato

युधिष्ठिर महतो | पत्रकार एवं लेखक युधिष्ठिर महतो वर्ष 2017 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय पत्रकार, लेखक, गीतकार और जनसंपर्क पेशेवर हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत रिपोर्टर के रूप में की और समाचार पत्रों, न्यूज़ पोर्टलों तथा टीवी चैनलों में काम करते हुए मीडिया के विभिन्न प्रारूपों में अनुभव हासिल किया। वे झारखंड क्रांति खबर में उप-संपादक के रूप में भी कार्य कर चुके हैं। वर्तमान में वे पत्रकारिता के साथ जनसंपर्क एवं संचार कार्य से जुड़े हैं और धनबाद तथा झारखंड से संबंधित सामाजिक, राजनीतिक, प्रशासनिक एवं जनसरोकार के मुद्दों पर लगातार लिखते हैं। Aaryaa News पर उनके नाम से प्रकाशित खबरों में स्थानीय घटनाक्रम से लेकर राज्य की महत्वपूर्ण राजनीतिक एवं सामाजिक गतिविधियां शामिल हैं। उन्होंने बिनोद बिहारी महतो कोयलांचल विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एम.ए. किया है। पत्रकारिता के साथ उन्हें साहित्य और रचनात्मक लेखन में भी विशेष रुचि है। वे हिंदी और खोरठा में गीत एवं कविताएं लिखते हैं और उनके लिखे कई गीत विभिन्न ऑडियो प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हैं। पत्रकारिता, जनसंपर्क और रचनात्मक लेखन—इन तीनों क्षेत्रों में सक्रियता युधिष्ठिर महतो की पेशेवर पहचान को अलग आयाम देती है।

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