Home झारखण्ड माता जानकी भारतीय संस्कृति में आदर्श नारी के रूप में पूजी जाती हैं – ब्राह्मण महासभा
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माता जानकी भारतीय संस्कृति में आदर्श नारी के रूप में पूजी जाती हैं – ब्राह्मण महासभा

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Mata Janaki is worshiped as an ideal woman in Indian culture - Brahmin Mahasabha
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रांची । बाबा विद्यापति स्मारक समिति कचहरी चौक स्थित प्रधान कार्यालय में समिति के प्रधान महासचिव मृत्युंजय झा की अध्यक्षता में मुख्य अतिथि ब्राह्मण महासभा के प्रांतीय संयोजक मनोज कुमार पाण्डेय की उपस्थिति में माता जानकी का जन्म उत्सव माता के चरणों में पुष्प अर्पित कर एवं प्रसाद वितरण कर धूमधाम से मनाई गई।पाण्डेय ने माता के जन्मोत्सव के अवसर पर कहा कि हिंदू धर्म के अत्यंत आदरणीय और पवित्र देवी माता सीता जिन्हें हम लक्ष्मी माता का अवतार और भगवान विष्णु के अवतार श्रीराम की पत्नी हैं।इन्हें मिथिला के राजा जनक की पुत्री होने के कारण जानकी और जनक सुता भी कहा जाता है।माता जानकी का जन्म बिहार के सीतामढ़ी जिले के पुनौरा धाम में हुआ।मान्यता है कि राजा जनक खेत में हल चला रहे थे, उसी समय एक मिट्टी के बड़े घड़े में (कलश) माता प्रकट हुई थी, इसलिए इन्हें भूमि पुत्री भी कहा जाता है।
समिति के महासचिव मृत्युंजय झा ने कहा कि जगत जननी माता सीता पवित्रता प्रेम समर्पण और सहनशीलता का प्रतीक मानी जाती हैं।कार्यक्रम का संचालन संतोष मिश्रा एवं धन्यवाद ज्ञापन समिति के कानूनी सलाहकार छवि झा ने किया। कार्यक्रम में मनोज कुमार झा,पवन कुमार झा,राजेश कुमार झा,अमित कुमार झा,पवन कुमार सोनी एवं अन्य लोग उपस्थित रहें।

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Written by
Yudhishthir Mahato

युधिष्ठिर महतो | पत्रकार एवं लेखक युधिष्ठिर महतो वर्ष 2017 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय पत्रकार, लेखक, गीतकार और जनसंपर्क पेशेवर हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत रिपोर्टर के रूप में की और समाचार पत्रों, न्यूज़ पोर्टलों तथा टीवी चैनलों में काम करते हुए मीडिया के विभिन्न प्रारूपों में अनुभव हासिल किया। वे झारखंड क्रांति खबर में उप-संपादक के रूप में भी कार्य कर चुके हैं। वर्तमान में वे पत्रकारिता के साथ जनसंपर्क एवं संचार कार्य से जुड़े हैं और धनबाद तथा झारखंड से संबंधित सामाजिक, राजनीतिक, प्रशासनिक एवं जनसरोकार के मुद्दों पर लगातार लिखते हैं। Aaryaa News पर उनके नाम से प्रकाशित खबरों में स्थानीय घटनाक्रम से लेकर राज्य की महत्वपूर्ण राजनीतिक एवं सामाजिक गतिविधियां शामिल हैं। उन्होंने बिनोद बिहारी महतो कोयलांचल विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एम.ए. किया है। पत्रकारिता के साथ उन्हें साहित्य और रचनात्मक लेखन में भी विशेष रुचि है। वे हिंदी और खोरठा में गीत एवं कविताएं लिखते हैं और उनके लिखे कई गीत विभिन्न ऑडियो प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हैं। पत्रकारिता, जनसंपर्क और रचनात्मक लेखन—इन तीनों क्षेत्रों में सक्रियता युधिष्ठिर महतो की पेशेवर पहचान को अलग आयाम देती है।

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