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भारतीय वायुसेना को स्वदेशी विमानस्थ प्रारंभिक चेतावनी एवं नियंत्रण प्रणाली ‘नेत्र’ के लिए अंतिम परिचालन स्वीकृति मिली

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The Indian Air Force has received Final Operational Clearance for the indigenous airborne early warning and control system 'Netra'.
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नई दिल्ली : रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने स्वदेशी ‘नेत्र’ विमानस्थ प्रारंभिक चेतावनी एवं नियंत्रण प्रणाली का अंतिम परिचालन स्वीकृति (एफओसी) प्रमाणपत्र भारतीय वायुसेना को सौंपकर एक अहम उपलब्धि हासिल की है। भारतीय वायुसेना, डीआरडीओ और संबंधित रक्षा उद्योग जगत के सहयोग से विकसित इस प्रणाली को हवाई निगरानी, स्थिति संबंधी जागरूकता तथा युद्ध प्रबंधन क्षमताओं को सुदृढ़ करने के लिए तैयार किया गया है। साल 2017 में प्रारंभिक परिचालन स्वीकृति (आईओसी) प्राप्त करने के बाद अब अंतिम परिचालन स्वीकृति मिलना इस परियोजना की पूर्ण परिचालन क्षमता का प्रमाण है और उन्नत रक्षा प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
इस समारोह का आयोजन 25 जून को कर्नाटक के बेंगलुरु में किया गया, जिसकी अध्यक्षता डिप्टी चीफ ऑफ एयर स्टाफ एयर मार्शल अवधेश कुमार भारती ने की। इस अवसर पर पूर्व वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल आर.के.एस. भदौरिया (सेवानिवृत्त), डीआरडीओ के पूर्व अध्यक्ष डॉ. एस. क्रिस्टोफर, भारतीय वायुसेना के वर्तमान एवं सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारी, सेंटर फॉर एयरबोर्न सिस्टम्स (सीएबीएस) की निदेशक व विशिष्ट वैज्ञानिक पी. संध्या उपस्थित थीं। इनके अतिरिक्त विशिष्ट वैज्ञानिक और मुख्य कार्यकारी (उड़ानयोग्यता) ए.पी.वी.एस. प्रसाद, वैज्ञानिक ‘जी’ एवं नेत्र एफओसी परियोजना प्रमुख ए.एस. कुमारन, डीआरडीओ के अन्य वरिष्ठ अधिकारी तथा रक्षा उद्योग जगत के साझेदार भी मौजूद थे।
डिप्टी चीफ ऑफ एयर स्टाफ ने अपने संबोधन में स्वदेशी ‘नेत्र’ विमानस्थ प्रारंभिक चेतावनी एवं नियंत्रण प्रणाली को अंतिम परिचालन स्वीकृति मिलने पर इसकी सराहना की। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर और बालाकोट हवाई हमले के दौरान इस प्रणाली के परिचालन उपयोग व विश्वसनीयता का उल्लेख किया। एयर मार्शल ने कहा कि स्वदेशी प्रौद्योगिकियां सशस्त्र बलों को बदलती युद्ध परिस्थितियों के अनुरूप प्रणालियों में आवश्यक संशोधन और अनुकूलन करने की क्षमता प्रदान करती हैं। उन्होंने डीआरडीओ, भारतीय वायुसेना और उद्योग जगत के बीच उत्कृष्ट समन्वय की भी सराहना की, जिसने इस कार्यक्रम की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

डीआरडीओ के एयरोनॉटिक्स क्लस्टर की महानिदेशक डॉ. के. राजलक्ष्मी मेनन ने ‘नेत्र’ प्रणाली के विकास और उसके सफल सफर का उल्लेख किया। उन्होंने कार्यक्रम के दौरान सामने आई चुनौतियों व उन महत्वपूर्ण निर्णयों पर प्रकाश डाला, जिनकी बदौलत परियोजना अपने निर्धारित उद्देश्यों को प्राप्त कर सकी और भारतीय वायुसेना को पूर्णतः परिचालन-तैयार प्रणाली उपलब्ध कराई जा सकी। महानिदेशक ने सिस्टम इंजीनियरिंग के महत्व पर विशेष जोर देते हुए बताया कि उड़ान परीक्षणों की योजना बनाने और उन्हें सफलतापूर्वक पूरा करने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका रही।

डीआरडीओ के इलेक्ट्रॉनिक्स क्लस्टर के विशिष्ट वैज्ञानिक एवं महानिदेशक डॉ. बी.के. दास ने कहा कि इस कार्यक्रम की सफलता का प्रमुख आधार सभी हितधारकों के बीच प्रभावी समन्वय और सहयोग रहा है। उन्होंने ‘नेत्र’ विमानस्थ प्रारंभिक चेतावनी एवं नियंत्रण प्रणाली को आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए कहा कि यह ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य की प्राप्ति में भी महत्वपूर्ण योगदान देने वाली एक उल्लेखनीय मिसाल है।

मुख्य योगदानकर्ताओं को सम्मान

इस अवसर पर उन संगठनों और इकाइयों को विशेष रूप से सम्मानित किया गया, जिन्होंने ‘नेत्र’ विमानस्थ प्रारंभिक चेतावनी एवं नियंत्रण प्रणाली के विकास, परीक्षण व सफल परिचालन में महत्वपूर्ण योगदान दिया। एक अवधारणा को पूर्णतः कार्यशील और परिचालन-तैयार प्रणाली में परिवर्तित करने में सभी संबंधित पक्षों की भूमिका को रेखांकित करते हुए उनके योगदान की सराहना की गई।

स्वदेशी क्षमता विकास में एक मील का पत्थर

‘नेत्र’ विमानस्थ प्रारंभिक चेतावनी एवं नियंत्रण प्रणाली का सफलतापूर्वक परिचालन सेवा में शामिल होना, स्वदेशीकरण, नवाचार और सशस्त्र बलों की क्षमताओं को सुदृढ़ बनाने के प्रति डीआरडीओ की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह उपलब्धि इसके उपयोगकर्ताओं, वैज्ञानिक संस्थानों और रक्षा उत्पादन संगठनों के बीच प्रभावी समन्वय तथा सहयोग का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।

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Written by
Yudhishthir Mahato

युधिष्ठिर महतो | पत्रकार एवं लेखक युधिष्ठिर महतो वर्ष 2017 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय पत्रकार, लेखक, गीतकार और जनसंपर्क पेशेवर हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत रिपोर्टर के रूप में की और समाचार पत्रों, न्यूज़ पोर्टलों तथा टीवी चैनलों में काम करते हुए मीडिया के विभिन्न प्रारूपों में अनुभव हासिल किया। वे झारखंड क्रांति खबर में उप-संपादक के रूप में भी कार्य कर चुके हैं। वर्तमान में वे पत्रकारिता के साथ जनसंपर्क एवं संचार कार्य से जुड़े हैं और धनबाद तथा झारखंड से संबंधित सामाजिक, राजनीतिक, प्रशासनिक एवं जनसरोकार के मुद्दों पर लगातार लिखते हैं। Aaryaa News पर उनके नाम से प्रकाशित खबरों में स्थानीय घटनाक्रम से लेकर राज्य की महत्वपूर्ण राजनीतिक एवं सामाजिक गतिविधियां शामिल हैं। उन्होंने बिनोद बिहारी महतो कोयलांचल विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एम.ए. किया है। पत्रकारिता के साथ उन्हें साहित्य और रचनात्मक लेखन में भी विशेष रुचि है। वे हिंदी और खोरठा में गीत एवं कविताएं लिखते हैं और उनके लिखे कई गीत विभिन्न ऑडियो प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हैं। पत्रकारिता, जनसंपर्क और रचनात्मक लेखन—इन तीनों क्षेत्रों में सक्रियता युधिष्ठिर महतो की पेशेवर पहचान को अलग आयाम देती है।

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