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एआई, परमाणु, अंतरिक्ष और क्वांटम प्रौद्योगिकियां भविष्य के विकास और वैश्विक प्रतिस्पर्धा की रूपरेखा निर्धारित करेंगी : डॉ. जितेंद्र सिंह

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AI, nuclear, space, and quantum technologies will shape the contours of future development and global competitiveness: Dr. Jitendra Singh
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राष्ट्रीय क्वांटम मिशन ने तीन वर्षों के भीतर अपने आधे से अधिक लक्ष्य हासिल कर लिए, भारत अग्रणी देशों के साथ कदम मिलाकर आगे बढ़ रहा है : डॉ. जितेंद्र सिंह

एआई सभी क्षेत्रों में एक आवश्यक उपकरण बन रही है, एनईपी 2020 एक क्रांतिकारी कदम है, जो नवप्रवर्तकों और क्षेत्र विशेषज्ञों की एक नई पीढ़ी की नींव रख रही है : डॉ. जितेंद्र सिंह

नई दिल्ली : विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और प्रधानमंत्री कार्यालय में कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), परमाणु, अंतरिक्ष और क्वांटम प्रौद्योगिकियां भविष्य के विकास और वैश्विक प्रतिस्पर्धा की रूपरेखा निर्धारित करेंगी।

मंत्री ने आगे कहा कि भारत अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों में एक प्रमुख शक्ति के रूप में तेजी से उभर रहा है, और राष्ट्रीय क्वांटम मिशन (NQM) ने 2023 में शुरू होने के तीन साल के भीतर ही अपने लक्षित परिणामों में से आधे से अधिक हासिल कर लिए हैं।

एक प्रमुख समाचार चैनल द्वारा आयोजित मीडिया सम्मेलन के दौरान एक अनौपचारिक वार्तालाप में, डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत आज एक ऐसे मुकाम पर खड़ा है जहां वह कई महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में अग्रणी देशों के साथ प्रगति कर रहा है और लगातार ऐसी क्षमताएं विकसित कर रहा है जो आर्थिक विकास, राष्ट्रीय सुरक्षा और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के अगले युग को परिभाषित करेंगी।

मंत्री ने कहा कि अंतरिक्ष, परमाणु और क्वांटम प्रौद्योगिकियां भविष्य की विश्व व्यवस्था को आकार देने में निर्णायक भूमिका निभाएंगी, जो न केवल आर्थिक प्रगति बल्कि रणनीतिक शक्ति और भू-राजनीतिक स्थिति को भी प्रभावित करेंगी। उन्होंने कहा, “जो देश इन प्रौद्योगिकियों में पिछड़ जाते हैं, उन्हें विकास और सुरक्षा दोनों में पिछड़ने का खतरा रहता है।”

राष्ट्रीय क्वांटम मिशन का जिक्र करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां निर्धारित समय से पहले ही हासिल कर ली गई हैं। उन्होंने कहा कि क्वांटम-सुरक्षित संचार के क्षेत्र में पहले ही काफी प्रगति हो चुकी है, जिसका रक्षा, रणनीतिक संचार, साइबर सुरक्षा और संवेदनशील सूचनाओं की सुरक्षा में महत्वपूर्ण अनुप्रयोग है।

मंत्री ने कहा कि मिशन के तहत हासिल की गई प्रगति की गति भारत की बढ़ती वैज्ञानिक क्षमताओं और उभरती प्रौद्योगिकियों में वैश्विक अग्रणी बनने की उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है। उन्होंने आगे कहा कि भारत क्वांटम संचार, क्वांटम कंप्यूटिंग और संबंधित अनुसंधान क्षेत्रों सहित क्वांटम ईकोसिस्टम में तेजी से प्रगति कर रहा है।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) पर बोलते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि एआई हर क्षेत्र में एक आवश्यक उपकरण बनता जा रहा है और शासन, उद्योग, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, अनुसंधान और सार्वजनिक सेवा वितरण को तेजी से प्रभावित करेगा। उन्होंने कहा कि भारत डिजिटल अवसंरचना, कंप्यूटिंग क्षमता, डेटा संसाधनों और विश्वसनीय ऊर्जा प्रणालियों में निवेश के माध्यम से सहायक ईकोसिस्टम को मजबूत कर रहा है।

मंत्री ने कहा कि आधुनिक विश्व में तकनीकी प्रगति विकास का प्रमुख चालक बन गई है और कोई भी राष्ट्र नवाचार और अत्याधुनिक तकनीकों को अपनाए बिना दीर्घकालिक विकास को बनाए नहीं रख सकता। उन्होंने आगे कहा कि भारत समावेशी विकास, लोकतांत्रिक मूल्यों और सामाजिक कल्याण के प्रति प्रतिबद्ध रहते हुए इस परिवर्तन की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में किए गए नीतिगत सुधारों की श्रृंखला ने नवाचार, उद्यमिता और वैज्ञानिक प्रगति के अवसरों का विस्तार किया है। उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष क्षेत्र के खुलने से एक जीवंत स्टार्टअप इकोसिस्टम विकसित हुआ है, जबकि परमाणु क्षेत्र में हाल की नीतिगत पहल से रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र में निवेश, तकनीकी सहयोग और क्षमता निर्माण में तेजी आने की उम्मीद है।

मंत्री ने कहा कि उन्नत कंप्यूटिंग, डेटा केंद्रों और डिजिटल सेवाओं की बढ़ती मांग के लिए मजबूत और भरोसेमंद ऊर्जा स्रोतों की आवश्यकता होगी। इस संदर्भ में उन्होंने कहा कि भारत की प्रौद्योगिकी-आधारित वृद्धि को समर्थन देने और देश के स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन में योगदान देने में परमाणु ऊर्जा की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती जाएगी।

शिक्षा सुधारों पर बोलते हुए, डॉ. जितेंद्र सिंह ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 को एक परिवर्तनकारी कदम बताया जिसने छात्रों के सीखने, उच्च शिक्षा और अनुसंधान के प्रति दृष्टिकोण को मौलिक रूप से बदल दिया है। उन्होंने कहा कि इस नीति ने कठोर अकादमिक मार्गों को लचीलेपन और बहुविषयक अवसरों से बदल दिया है, जिससे छात्रों को अपनी रुचियों, योग्यता और आकांक्षाओं के अनुरूप करियर बनाने में मदद मिली है।

उन्होंने कहा कि एनईपी 2020 छात्रों को वास्तविक रुचि और क्षमता के आधार पर अनुसंधान और नवाचार में प्रवेश करने के लिए प्रोत्साहित करके एक मजबूत और अधिक जीवंत अनुसंधान ईकोसिस्टम के लिए परिस्थितियाँ बना रही है। उन्होंने कहा कि इससे वैज्ञानिक अनुसंधान की गुणवत्ता में सुधार होगा और नवप्रवर्तकों, उद्यमियों और प्रौद्योगिकी नेताओं की एक नई पीढ़ी को पोषित करने में मदद मिलेगी।

व्यापक अनुसंधान एवं विकास परिदृश्य पर बोलते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत सरकार-केंद्रित नवाचार मॉडल से हटकर एक अधिक सहयोगात्मक ईकोसिस्टम की ओर संरचनात्मक बदलाव देख रहा है, जिसमें शिक्षा जगत, उद्योग, स्टार्टअप और निजी उद्यम शामिल हैं। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक प्रगति के लिए वित्तीय, तकनीकी और बौद्धिक संसाधनों का एकीकरण आवश्यक है, और देश लगातार ऐसा वातावरण बना रहा है जो इस तरह की साझेदारियों को प्रोत्साहित करता है।

मंत्री ने कहा कि हाल के वर्षों में किए गए सुधारों ने भारत के नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को काफी मजबूत किया है और वैज्ञानिक खोज, प्रौद्योगिकी विकास और अनुसंधान परिणामों के व्यावसायीकरण के लिए नए अवसर पैदा किए हैं।

भविष्य के लिए, डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता और क्वांटम प्रौद्योगिकियां आने वाले दशकों में समाजों को अभूतपूर्व गति से बदलने की क्षमता रखती हैं। उन्होंने कहा कि आज विकसित हो रही संस्थाएं, नीतियां और तकनीकी क्षमताएं भविष्य में राष्ट्रों की दिशा निर्धारित करेंगी।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने युवाओं से भारत के वैज्ञानिक और तकनीकी परिवर्तन में सक्रिय रूप से भाग लेने का आह्वान करते हुए कहा कि वर्तमान पीढ़ी के पास ज्ञान, सूचना और शिक्षण संसाधनों तक अभूतपूर्व पहुंच है। उन्होंने छात्रों से इन अवसरों का लाभ उठाने, वैज्ञानिक सोच विकसित करने और भारत को ज्ञान और नवाचार से प्रेरित अग्रणी राष्ट्र के रूप में उभरने में योगदान देने का आग्रह किया।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि शिक्षा, अनुसंधान, अंतरिक्ष, परमाणु ऊर्जा और उभरती प्रौद्योगिकियों में सुधारों के माध्यम से रखी गई नींव 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में भारत की यात्रा को मजबूत करेगी और देश को विश्व की अग्रणी नवाचार-संचालित अर्थव्यवस्थाओं में स्थान दिलाएगी।

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Written by
Yudhishthir Mahato

युधिष्ठिर महतो | पत्रकार एवं लेखक युधिष्ठिर महतो वर्ष 2017 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय पत्रकार, लेखक, गीतकार और जनसंपर्क पेशेवर हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत रिपोर्टर के रूप में की और समाचार पत्रों, न्यूज़ पोर्टलों तथा टीवी चैनलों में काम करते हुए मीडिया के विभिन्न प्रारूपों में अनुभव हासिल किया। वे झारखंड क्रांति खबर में उप-संपादक के रूप में भी कार्य कर चुके हैं। वर्तमान में वे पत्रकारिता के साथ जनसंपर्क एवं संचार कार्य से जुड़े हैं और धनबाद तथा झारखंड से संबंधित सामाजिक, राजनीतिक, प्रशासनिक एवं जनसरोकार के मुद्दों पर लगातार लिखते हैं। Aaryaa News पर उनके नाम से प्रकाशित खबरों में स्थानीय घटनाक्रम से लेकर राज्य की महत्वपूर्ण राजनीतिक एवं सामाजिक गतिविधियां शामिल हैं। उन्होंने बिनोद बिहारी महतो कोयलांचल विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एम.ए. किया है। पत्रकारिता के साथ उन्हें साहित्य और रचनात्मक लेखन में भी विशेष रुचि है। वे हिंदी और खोरठा में गीत एवं कविताएं लिखते हैं और उनके लिखे कई गीत विभिन्न ऑडियो प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हैं। पत्रकारिता, जनसंपर्क और रचनात्मक लेखन—इन तीनों क्षेत्रों में सक्रियता युधिष्ठिर महतो की पेशेवर पहचान को अलग आयाम देती है।

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