Home Breaking News रायपुर में ₹175 करोड़ की लागत से बढ़ेगी इलेक्ट्रिक इंजनों की रखरखाव क्षमता
Breaking NewsTop Newsदेशराष्ट्रीय न्यूज

रायपुर में ₹175 करोड़ की लागत से बढ़ेगी इलेक्ट्रिक इंजनों की रखरखाव क्षमता

Share
Major NCLT Ruling: Petition by 4 Producers, Including Sanjeev Kumar, Allowed
Share

भारतीय रेलवे का बड़ा फैसला : रायपुर में ₹175 करोड़ की लागत से बढ़ेगी इलेक्ट्रिक इंजनों की रखरखाव क्षमता

नई दिल्ली / रायपुर: भारतीय रेलवे ने अपने बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और ट्रेनों के सुरक्षित परिचालन को सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। रेलवे बोर्ड ने दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR) के रायपुर स्थित हाई हॉर्स पावर (HHP) डीजल शेड में 250 थ्री-फेज इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव (इलेक्ट्रिक इंजन) के लिए अतिरिक्त होमिंग सुविधाएं बनाने की मंजूरी दे दी है। इस पूरी परियोजना पर ₹175 करोड़ खर्च किए जाएंगे।

क्या होता है ‘होमिंग शेड’?

आसान शब्दों में कहें तो ‘होमिंग’ का मतलब किसी रेल इंजन को एक निश्चित लोकोमोटिव शेड में जगह देना है, जो उसका प्राइमरी मेंटेनेंस सेंटर (प्राथमिक रखरखाव केंद्र) होता है।

  • यहाँ इंजनों की रूटीन चेकिंग, सुरक्षा निरीक्षण, तकनीकी मरम्मत और पूरी देखभाल की जाती है।
  • इससे ट्रेनों का सुरक्षित और समय पर चलना सुनिश्चित होता है।

💡 क्यों पड़ी इसकी जरूरत? (परियोजना के मुख्य उद्देश्य)

  • बेड़े का विस्तार और आधुनिकीकरण: भारतीय रेलवे में इलेक्ट्रिक इंजनों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। माल ढुलाई और यात्री ट्रेनों के बढ़ते फेरों को देखते हुए नए और आधुनिक मेंटेनेंस सेंटर्स की भारी जरूरत है।
  • मौजूदा परिसंपत्तियों का सही उपयोग: इस प्रोजेक्ट से रायपुर डिपो के पास उपलब्ध मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर का बेहतर और अधिकतम इस्तेमाल हो सकेगा।
  • भविष्य की तैयारी: इस विस्तार से न सिर्फ वर्तमान जरूरतें पूरी होंगी, बल्कि भविष्य में होने वाले तकनीकी बदलावों और नए इंजनों के लिए भी पर्याप्त स्पेस (जगह) उपलब्ध रहेगा।

बड़ी बात: बुनियादी ढांचे में सुधार की यह पहल भारतीय रेलवे की कार्यक्षमता को बढ़ाने, रखरखाव के समय को कम करने और देश में रेल कनेक्टिविटी को और अधिक सुरक्षित व कुशल बनाने में मील का पत्थर साबित होगी।

Share
Written by
Yudhishthir Mahato

युधिष्ठिर महतो | पत्रकार एवं लेखक युधिष्ठिर महतो वर्ष 2017 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय पत्रकार, लेखक, गीतकार और जनसंपर्क पेशेवर हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत रिपोर्टर के रूप में की और समाचार पत्रों, न्यूज़ पोर्टलों तथा टीवी चैनलों में काम करते हुए मीडिया के विभिन्न प्रारूपों में अनुभव हासिल किया। वे झारखंड क्रांति खबर में उप-संपादक के रूप में भी कार्य कर चुके हैं। वर्तमान में वे पत्रकारिता के साथ जनसंपर्क एवं संचार कार्य से जुड़े हैं और धनबाद तथा झारखंड से संबंधित सामाजिक, राजनीतिक, प्रशासनिक एवं जनसरोकार के मुद्दों पर लगातार लिखते हैं। Aaryaa News पर उनके नाम से प्रकाशित खबरों में स्थानीय घटनाक्रम से लेकर राज्य की महत्वपूर्ण राजनीतिक एवं सामाजिक गतिविधियां शामिल हैं। उन्होंने बिनोद बिहारी महतो कोयलांचल विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एम.ए. किया है। पत्रकारिता के साथ उन्हें साहित्य और रचनात्मक लेखन में भी विशेष रुचि है। वे हिंदी और खोरठा में गीत एवं कविताएं लिखते हैं और उनके लिखे कई गीत विभिन्न ऑडियो प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हैं। पत्रकारिता, जनसंपर्क और रचनात्मक लेखन—इन तीनों क्षेत्रों में सक्रियता युधिष्ठिर महतो की पेशेवर पहचान को अलग आयाम देती है।

Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related Articles

NAMASTE Scheme Success Story: सीवर सफाई से ‘स्वच्छता उद्यमी’ बनने तक गाजियाबाद के अजय की कहानी

केंद्र सरकार की 'नमस्ते योजना' से स्वच्छता कर्मी अजय बने उद्यमी। जानें...