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नीति आयोग ने ‘शांति अधिनियम 2025’ के कार्यान्वयन पर बुलाई महत्वपूर्ण परामर्श बैठक

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NITI Aayog convened a crucial consultation meeting on the implementation of the 'Peace Act 2025'.
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बैठक में जुटे देश-विदेश के विशेषज्ञ

नई दिल्ली: नीति आयोग ने 10 जुलाई को नई दिल्ली स्थित डॉ. अंबेडकर अंतर्राष्ट्रीय केंद्र के समरसता सभागार में शांति अधिनियम 2025 के सफल कार्यान्वयन को लेकर एक उच्च स्तरीय परामर्श बैठक आयोजित की। इस बैठक में सरकार, नीति निर्माताओं, प्रमुख अनुसंधान संस्थानों और उद्योग जगत के शीर्ष विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। सभी हितधारकों ने इस मील का पत्थर साबित होने वाले अधिनियम के परिचालन तंत्र और इसके भविष्य के रोडमैप पर विस्तार से विचार-विमर्श किया।

बैठक की अध्यक्षता और प्रमुख गणमान्य व्यक्ति

इस महत्वपूर्ण परामर्श बैठक की अध्यक्षता नीति आयोग के सदस्य प्रोफेसर अभय करंदीकर ने की। बैठक में देश के कई शीर्ष नीति निर्माता और प्रशासनिक अधिकारी शामिल हुए, जिनमें प्रमुख रूप से शामिल थे:

  • पंकज अग्रवाल (सचिव, एमओपी)
  • घनश्याम प्रसाद (अध्यक्ष, सीईए)
  • गुरदीप सिंह (सीएमडी, एनटीपीसी लिमिटेड)
  • डॉ. अंशु भारद्वाज (कार्यक्रम निदेशक, नीति आयोग)
  • राजनाथ राम (सलाहकार, नीति आयोग)
  • डॉ. गरिमा शर्मा (प्रमुख, एसएसएसडी, डीएई)
  • हरि कुमार (विशिष्ट वैज्ञानिक और निदेशक, एईआरबी)

तकनीकी चर्चा के 3 मुख्य स्तंभ (Key Highlights)

बैठक के दौरान तकनीकी चर्चाओं को मुख्य रूप से तीन महत्वपूर्ण बिंदुओं पर केंद्रित किया गया, जो इस अधिनियम की सफलता के लिए रीढ़ की हड्डी माने जा रहे हैं:

1. विधायी एवं नियामक ढांचा

बैठक के शुरुआती तकनीकी सत्र में शांति अधिनियम, 2025 के तहत संवैधानिक अनुपालन तंत्र को प्रस्तुत किया गया। इसके मसौदा नियमों, विनियमों और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) नीति के प्रावधानों पर गहन मंथन हुआ। चर्चा का मुख्य उद्देश्य यह रहा कि घरेलू हितों की पूरी तरह रक्षा करते हुए विदेशी पूंजी को कैसे आकर्षित किया जाए।

2. वित्त, बीमा और जनधारणा

परियोजनाओं को जमीन पर उतारने के लिए वित्तीय तंत्र और जोखिम-निवारण (Risk Mitigation) ढांचों की समीक्षा की गई। दीर्घकालिक और बड़ी परियोजनाओं के लिए उपयुक्त बीमा व्यवस्थाओं पर बात हुई। साथ ही, परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं के प्रति जन जागरूकता बढ़ाने, सामुदायिक विश्वास को मजबूत करने और व्यापक जन-स्वीकृति हासिल करने की रणनीतियों पर भी विशेषज्ञों ने अपने सुझाव रखे।

3. विनिर्माण, संचालन एवं क्षमता विकास

इस सत्र का पूरा ध्यान व्यावहारिक और परिचालन चरण पर था। इसके तहत:

  • घरेलू विनिर्माण क्षमताओं को सुदृढ़ करने और आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) को मजबूत बनाने पर जोर दिया गया।
  • औद्योगिक विस्तार को बढ़ावा देने के लिए एक कुशल कार्यबल (Skilled Workforce) तैयार करने की आवश्यकता जताई गई।
  • उच्च कोटि के सक्षम मानव संसाधन आधार को विकसित करने के लिए समर्पित क्षमता विकास कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार करने पर सहमति बनी।

निष्कर्ष: बैठक के अंत में नीति आयोग और उपस्थित हितधारकों ने माना कि तीनों क्षेत्रों से निकलकर आए विविध और बहुमूल्य विचार शांति अधिनियम, 2025 के कार्यान्वयन तंत्र को और अधिक व्यावहारिक व मजबूत बनाने में मील का पत्थर साबित होंगे।

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Written by
Yudhishthir Mahato

युधिष्ठिर महतो | पत्रकार एवं लेखक युधिष्ठिर महतो वर्ष 2017 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय पत्रकार, लेखक, गीतकार और जनसंपर्क पेशेवर हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत रिपोर्टर के रूप में की और समाचार पत्रों, न्यूज़ पोर्टलों तथा टीवी चैनलों में काम करते हुए मीडिया के विभिन्न प्रारूपों में अनुभव हासिल किया। वे झारखंड क्रांति खबर में उप-संपादक के रूप में भी कार्य कर चुके हैं। वर्तमान में वे पत्रकारिता के साथ जनसंपर्क एवं संचार कार्य से जुड़े हैं और धनबाद तथा झारखंड से संबंधित सामाजिक, राजनीतिक, प्रशासनिक एवं जनसरोकार के मुद्दों पर लगातार लिखते हैं। Aaryaa News पर उनके नाम से प्रकाशित खबरों में स्थानीय घटनाक्रम से लेकर राज्य की महत्वपूर्ण राजनीतिक एवं सामाजिक गतिविधियां शामिल हैं। उन्होंने बिनोद बिहारी महतो कोयलांचल विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एम.ए. किया है। पत्रकारिता के साथ उन्हें साहित्य और रचनात्मक लेखन में भी विशेष रुचि है। वे हिंदी और खोरठा में गीत एवं कविताएं लिखते हैं और उनके लिखे कई गीत विभिन्न ऑडियो प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हैं। पत्रकारिता, जनसंपर्क और रचनात्मक लेखन—इन तीनों क्षेत्रों में सक्रियता युधिष्ठिर महतो की पेशेवर पहचान को अलग आयाम देती है।

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