नई दिल्ली : केंद्र सरकार का अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय अपनी योजनाओं और कार्यक्रमों के क्रियान्वयन तथा निगरानी में पारदर्शिता, दक्षता और प्रभावशीलता बढ़ाने के लिए एआई (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) और उभरती हुई डिजिटल प्रौद्योगिकियों का व्यापक उपयोग कर रहा है। केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने लोकसभा में एक लिखित उत्तर के दौरान यह जानकारी दी।
- इंडियाएआई मिशन के तहत तकनीकी सहयोग: मंत्रालय ‘इंडियाएआई मिशन’ के तहत संप्रभु एआई (Sovereign AI) कंपनियों के साथ मिलकर एआई-सक्षम बहुभाषी चैटबॉट, वर्चुअल सहायता और इंटेलिजेंट डिजिटल इंटरफेस विकसित करने की संभावनाएं तलाश रहा है।
- नागरिक-केंद्रित सेवाएं: इसमें ‘हज सुविधा ऐप’ जैसी प्रमुख डिजिटल पहलें शामिल हैं, जिससे लाभार्थियों को सुलभ और पारदर्शी सेवाएं मिल सकें।
- इंडियाएआई मिशन के 7 स्तंभ: देश में एक जिम्मेदार एआई इकोसिस्टम स्थापित करने के लिए इस मिशन में सात प्रमुख स्तंभ शामिल हैं— इंडियाएआई कंप्यूट, फाउंडेशन मॉडल्स, एप्लिकेशन डेवलपमेंट इनिशिएटिव, फ्यूचर स्किल्स, एआईकोश (डेटासेट्स प्लेटफॉर्म), सुरक्षित व विश्वसनीय एआई, और स्टार्टअप फाइनेंसिंग।
- डेटा गोपनीयता व सुरक्षा कानून: व्यक्तिगत डेटा के प्रसंस्करण में ‘डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023’ और 5 नवंबर 2025 को जारी ‘इंडिया एआई गवर्नेंस दिशानिर्देशों’ के तहत तय मानकों, शिकायत निवारण तंत्र और सुरक्षा उपायों का पूर्ण अनुपालन किया जा रहा है।
- एआई विज़न सेंटर्स पर स्थिति: मंत्रालय की डिजिटल पहलें उसकी योजनाओं के समग्र प्रशासन का हिस्सा हैं, इसलिए अल्पसंख्यकों के लिए ‘एआई विज़न सेंटर्स’ (आवेदन, स्वीकृति, निधि आवंटन, लाभार्थी आदि) से जुड़ी जानकारी का अलग से कोई अलग आंकड़ा नहीं रखा जाता है।
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