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बस्तर में शांति की नई सुबह: 18 महिलाओं समेत 63 नक्सली सरेंडर, सीएम विष्णु देव साय बोले- विकास की राह पर बस्तर

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Dantewada Naxalites surrender, 63 Naxals surrender Chhattisgarh
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छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में 63 नक्सलियों ने सरेंडर किया, जिनमें 36 पर कुल 1.19 करोड़ का इनाम था। 18 महिलाएं शामिल, ‘पूना मार्गेम’ पहल के तहत। सीएम विष्णु देव साय बोले- बस्तर में शांति और विकास का नया दौर। 2025 में 1500+ सरेंडर।

1.19 करोड़ इनामी नक्सलियों का सरेंडर: दंतेवाड़ा में ‘पूना मार्गेम’ ने फिर किया कमाल, 1500+ सरेंडर 2025 में

दंतेवाड़ा में 63 नक्सलियों का सरेंडर: क्या हुआ?

छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में शुक्रवार को 63 नक्सलियों ने हथियार डाल दिए। इनमें 36 पर कुल 1.19 करोड़ 50 हजार रुपये का इनाम घोषित था। दंतेवाड़ा के एसपी गौरव राय ने बताया कि यह सरेंडर वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स (CRPF) के समक्ष ‘पूना मार्गेम’ (रिहैबिलिटेशन से सामाजिक पुनर्स्थापन तक) पहल के तहत हुआ।​

सरेंडर करने वालों में 18 महिलाएं शामिल थीं। ये नक्सली दक्षिण बस्तर, पश्चिम बस्तर, माड़ डिवीजन और ओडिशा सीमा के इलाकों में सक्रिय थे। एसपी राय ने कहा कि नक्सलियों ने माओवादी विचारधारा से मोहभंग की बात कही और राज्य सरकार की सरेंडर व रिहैबिलिटेशन नीति से प्रभावित होकर मुख्यधारा में लौटे।​

इनामी नक्सलियों की लिस्ट

सरेंडर करने वाले 36 इनामी नक्सलियों में कई बड़े नाम थे। इनका इनाम इस तरह बंटा:

  • 7 नक्सली: प्रत्येक पर 8 लाख रुपये (कुल 56 लाख) – पकुलु उर्फ प्रदीप ओयम (45, कल्हांडी एरिया कमिटी सेक्रेटरी), मोहन उर्फ आजाद कड़ती (32, डिविजनल कमिटी मेंबर), उनकी पत्नी सुमित्रा उर्फ द्रौपदी चापा (30, भैरमरह एरिया कमिटी सेक्रेटरी), हुंगी उर्फ राधिका लेका (28, प्लाटून पार्टी कमिटी मेंबर), सुकहराम ताती (20, कंपनी नंबर 1 मेंबर), पांडू मड़कम (19, कंपनी नंबर 7 मेंबर), सोमदू कड़ती (21, कंपनी नंबर 7 मेंबर)।
  • 7 नक्सली: प्रत्येक पर 5 लाख रुपये (कुल 35 लाख)।
  • 8 नक्सली: प्रत्येक पर 2 लाख रुपये (कुल 16 लाख)।
  • 11 नक्सली: प्रत्येक पर 1 लाख रुपये (कुल 11 लाख)।
  • 3 नक्सली: प्रत्येक पर 50 हजार रुपये (कुल 1.5 लाख)।​

बाकी 27 नक्सली बिना इनाम के थे। सभी 63 को तत्काल 50,000 रुपये की सहायता दी जाएगी और सरकारी नीति के तहत रिहैबिलिटेशन होगा।​

‘पूना मार्गेम’ पहल क्या है?

‘पूना मार्गेम’ छत्तीसगढ़ सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना है, जो नक्सलियों को हिंसा के रास्ते से हटाकर मुख्यधारा में लाने पर फोकस करती है। इसका मतलब है ‘रिहैबिलिटेशन से सामाजिक पुनर्स्थापन तक’। इस पहल के तहत सरेंडर करने वालों को नकद सहायता, कौशल प्रशिक्षण, कृषि भूमि, रोजगार के अवसर और सामाजिक एकीकरण का पैकेज मिलता है।​

दंतेवाड़ा एसपी गौरव राय ने कहा कि नक्सलियों ने माओवादी संगठन में जबरन भर्ती, लगातार सिक्योरिटी ऑपरेशंस और विकास की कमी से तंग आकर सरेंडर किया। सरकार की नीति ने उन्हें विश्वास दिलाया कि मुख्यधारा में लौटने पर सम्मानजनक जीवन मिलेगा।​

सीएम विष्णु देव साय का बयान

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इसे बस्तर के लिए ऐतिहासिक मील का पत्थर बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली केंद्र सरकार और गृह मंत्री अमित शाह की बहुआयामी सुरक्षा-विकास रणनीति का नतीजा है। ‘बंदूक नहीं, संवाद और विकास ही स्थायी समाधान’।​

सीएम ने कहा कि नक्सलवाद अब अंतिम चरण में है। बस्तर के दूरस्थ इलाकों में सड़कें, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और डिजिटल कनेक्टिविटी तेजी से पहुंच रही है। सरेंडर करने वालों को स्वावलंबी बनाने के लिए कौशल प्रशिक्षण, आजीविका सहायता और सामाजिक एकीकरण दिया जाएगा।​

बस्तर में नक्सल सरेंडर का ट्रेंड

2025 में छत्तीसगढ़ में 1500 से ज्यादा नक्सलियों ने सरेंडर किया, जो नक्सल नेटवर्क के कमजोर होने का संकेत है। दंतेवाड़ा में यह एक दिन का सबसे बड़ा सरेंडर था। 7 जनवरी को पड़ोसी सुकमा में 26 ने सरेंडर किया।​

  • 2025 में कुल सरेंडर: 1500+ (पुलिस आंकड़े)।
  • 2024 में भी सैकड़ों सरेंडर।
    केंद्र सरकार ने 31 मार्च 2026 तक देश से नक्सलवाद उखाड़ फेंकने का लक्ष्य रखा है। बस्तर IG सुंदरराज के अनुसार, इंटेलिजेंस बेस्ड ऑपरेशंस, DRG-CRPF की कार्रवाई और रिहैबिलिटेशन से नक्सलियों का मनोबल टूट रहा है।​

सरेंडर करने वालों को क्या मिलेगा?

छत्तीसगढ़ सरकार की नक्सली सरेंडर/पीड़ित राहत रिहैबिलिटेशन पॉलिसी-2025 के तहत:

  • तत्काल सहायता: 50,000 रुपये प्रति व्यक्ति।
  • कौशल विकास प्रशिक्षण: आईटीआई, वोकेशनल कोर्स।
  • कृषि भूमि व आजीविका: खेती, पशुपालन, लघु उद्योग के लिए लोन-सहायता।
  • रोजगार: सरकारी योजनाओं में प्राथमिकता, स्वरोजगार पैकेज।
  • सामाजिक एकीकरण: आवास, शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाएं।​

बस्तर में विकास की नई गति

सीएम विष्णु देव साय ने कहा कि बस्तर 10 साल में छत्तीसगढ़ का ताज हो जाएगा – पर्यटन हब बनेगा। ‘नियाद नेल्लानार’ योजना से सुरक्षा कैंपों के आसपास 52 योजनाओं के लाभ और 31 सामुदायिक सुविधाएं पहुंच रही हैं। सड़कें, बिजली, मोबाइल टावर, स्कूल-हॉस्पिटल बन रहे हैं।​

नक्सल प्रभावित इलाकों में 2025 में 256 नक्सली मारे गए, जो दबाव का नतीजा है। सरेंडर और विकास से बस्तर मुख्यधारा से जुड़ रहा है।

नक्सलवाद खत्म करने की रणनीति

केंद्र-राज्य सरकारों की संयुक्त रणनीति:

  • सिक्योरिटी ऑपरेशंस: CRPF, DRG, CoBRA की इंटेलिजेंस बेस्ड कार्रवाई।
  • विकास का विस्तार: सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य।
  • रिहैबिलिटेशन: आकर्षक सरेंडर पॉलिसी।
  • संवाद: नक्सलियों को मुख्यधारा में लौटने का भरोसा।​

सरेंडर के आंकड़े (2025)

जिला/क्षेत्रप्रमुख सरेंडरइनामी राशि (उदाहरण)
दंतेवाड़ा63 (जनवरी 2026)1.19 करोड़
सुकमा26 (जनवरी 7)
दंतेवाड़ा (नवंबर 2025)3765 लाख
कुल छत्तीसगढ़ 20251500+

5 अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

  1. सवाल: दंतेवाड़ा में कितने नक्सलियों ने सरेंडर किया और इनाम कितना था?
    जवाब: 63 नक्सलियों ने सरेंडर किया, जिनमें 36 पर कुल 1.19 करोड़ 50 हजार रुपये का इनाम था। 7 पर 8 लाख, 7 पर 5 लाख आदि।​
  2. सवाल: ‘पूना मार्गेम’ क्या है?
    जवाब: यह छत्तीसगढ़ सरकार की पहल है जो नक्सलियों को रिहैबिलिटेशन से सामाजिक पुनर्स्थापन तक ले जाती है – नकद सहायता, ट्रेनिंग, भूमि, रोजगार आदि।​
  3. सवाल: 2025 में छत्तीसगढ़ में कितने नक्सलियों ने सरेंडर किया?
    जवाब: 1500 से ज्यादा। दंतेवाड़ा जैसे जिलों में बड़े ग्रुप सरेंडर कर रहे हैं।​
  4. सवाल: सरेंडर करने वालों को क्या मिलेगा?
    जवाब: 50,000 रुपये तत्काल, कौशल ट्रेनिंग, कृषि भूमि, स्वरोजगार सहायता, शिक्षा-स्वास्थ्य सुविधाएं।​
  5. सवाल: नक्सलवाद कब खत्म होगा?
    जवाब: केंद्र सरकार ने 31 मार्च 2026 तक लक्ष्य रखा। बस्तर में विकास और ऑपरेशंस से तेजी आ रही है।
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