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₹5 लाख रिश्वत लेते BJP विधायक रंगेहाथ पकड़े गए: लोकायुक्त की ट्रैप कार्रवाई

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BJP MLA Chandru Lamani bribe
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गडग लोकायुक्त पुलिस ने BJP विधायक चंद्रू लामाणी को ₹5 लाख की रिश्वत लेते कथित तौर पर रंगेहाथ पकड़ा। ठेकेदार विजय पुजार की शिकायत पर ट्रैप लगाया गया था। मामला भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 7(a) व 7(A) के तहत दर्ज है; ₹11 लाख मांगने का आरोप है और विधायक के दो निजी सहायक भी जांच में हैं।

माइनर इरिगेशन काम के बदले रिश्वत? लोकायुक्त ने BJP विधायक और दो PAs को ‘सिक्योर’ किया, केस दर्ज

कर्नाटक: BJP विधायक चंद्रू लामाणी ₹5 लाख रिश्वत लेते लोकायुक्त के जाल में फंसे

कर्नाटक के गडग जिले में लोकायुक्त पुलिस ने BJP विधायक चंद्रू लामाणी को कथित तौर पर ₹5 लाख की रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ पकड़ा है। लोकायुक्त के अनुसार यह ट्रैप कार्रवाई एक ठेकेदार की शिकायत के आधार पर की गई और सफलता के साथ रिश्वत की रकम बरामद होने का दावा किया गया। इस मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत केस दर्ज किया गया है और जांच जारी है।​

यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि आरोप एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि पर है और रिश्वत मांग कथित तौर पर सरकारी काम के ठेके/क्रियान्वयन से जुड़ी बताई जा रही है। लोकायुक्त ने बयान में कहा कि आरोपी सार्वजनिक सेवक को ₹5 लाख लेते वक्त पकड़ा गया।​

कौन हैं आरोपी विधायक और शिकायत किसने की?

लोकायुक्त के मुताबिक आरोपी BJP विधायक का नाम चंद्रू लामाणी है, जो कर्नाटक की शिरहट्टी विधानसभा सीट का प्रतिनिधित्व करते हैं। शिकायतकर्ता का नाम विजय पुजार बताया गया है, जो इसी जिले के चिंचाली के रहने वाले क्लास‑I ठेकेदार हैं। ट्रैप इसी शिकायत के आधार पर गडग लोकायुक्त पुलिस स्टेशन की टीम ने लगाया।​

लोकायुक्त ने यह भी कहा कि रिश्वत मांग और भुगतान का संबंध माइनर इरिगेशन (लघु सिंचाई) विभाग के अंतर्गत होने वाले कार्यों से था। इनमें सड़क के किनारे रिटेनिंग वॉल (retaining walls) बनाने जैसे कामों का जिक्र किया गया है।​

आरोप क्या है: ₹11 लाख की मांग, ट्रैप में ₹5 लाख की स्वीकारोक्ति

लोकायुक्त अधिकारियों के अनुसार, आरोपी ने शिकायतकर्ता से काम “एग्जीक्यूट” कराने के लिए कुल ₹11 लाख की रिश्वत मांगी थी। ट्रैप के दौरान ₹5 लाख स्वीकार किए जाने का आरोप है, जिसके बाद कार्रवाई करके मामला दर्ज किया गया।​

मामले की कानूनी धाराएं भी लोकायुक्त ने स्पष्ट की हैं। अधिकारियों के मुताबिक केस भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7(a) के साथ 7(A) के तहत दर्ज हुआ है।​

तालिका: इस केस के मुख्य तथ्य

बिंदुविवरण
आरोपीBJP MLA चंद्रू लामाणी (शिरहट्टी) ​
शिकायतकर्ताविजय पुजार, क्लास‑I ठेकेदार (चिंचाली, गडग) ​
कथित मांग₹11 लाख ​
ट्रैप में कथित स्वीकार रकम₹5 लाख ​
संबंधित काम/विभागमाइनर इरिगेशन विभाग के कार्य, रिटेनिंग वॉल निर्माण आदि ​
कानूनी प्रावधानPC Act 1988, Section 7(a) read with 7(A) ​

विधायक के साथ दो निजी सहायक भी जांच में

लोकायुक्त के बयान के अनुसार, विधायक के साथ उनके दो निजी सहायकों (personal assistants) — मंजनाथ वाल्मीकि और गुरु नाइक — को भी इस मामले में “सिक्योर” किया गया है। लोकायुक्त ने कहा कि आरोपी 1, 2 और 3 को सुरक्षित किया गया है और आगे की जांच चल रही है।​

इसका मतलब यह है कि जांच एजेंसी केवल विधायक तक सीमित नहीं रहकर पूरे कथित लेनदेन और मध्यस्थ/सहयोगी भूमिका की भी पड़ताल कर रही है। आगे यह तय होगा कि इन सहायकों की भूमिका क्या थी और सबूत किस दिशा में जाते हैं।​

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं: डीके शिवकुमार का तंज, BJP का “तथ्य जानकर जवाब” रुख

घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने व्यंग्यात्मक टिप्पणी की। उन्होंने कहा, “BJP नेता बहुत ईमानदार हैं। वे इस देश में भ्रष्टाचार‑मुक्त हैं। लोकायुक्त को शायद कोई गलत जानकारी मिली होगी,” और जोड़ा कि वे लोकायुक्त की बात आने के बाद ही प्रतिक्रिया देंगे।​

वहीं कर्नाटक विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष चलवाडी नारायणस्वामी ने कहा कि वे विवरण से अवगत नहीं हैं और उनकी पार्टी रिश्वत को बर्दाश्त नहीं करती, इसलिए पूरी जानकारी जुटाने के बाद टिप्पणी करेंगे। राज्य BJP अध्यक्ष बी. वाई. विजयेंद्र ने भी कहा कि तथ्य पता करने के बाद ही प्रतिक्रिया देंगे।​

समर्थकों का दावा: “साजिश” और नारेबाज़ी

रिपोर्ट के अनुसार, लामाणी के समर्थकों ने लोकायुक्त की कार्रवाई की निंदा की और आरोप लगाया कि इसके पीछे कांग्रेस सरकार की “साजिश” है। उन्होंने कांग्रेस सरकार के खिलाफ नारे भी लगाए। यह संकेत देता है कि मामला अब सिर्फ कानूनी नहीं, राजनीतिक स्तर पर भी टकराव का रूप ले सकता है।​

हालांकि, किसी भी मामले में अंतिम निष्कर्ष अदालत में साक्ष्यों और जांच के आधार पर ही तय होता है। फिलहाल लोकायुक्त का कहना है कि जांच जारी है।​

आगे क्या हो सकता है: जांच की दिशा और संभावित सवाल

ऐसे मामलों में आमतौर पर जांच एजेंसी इन बिंदुओं पर फोकस करती है:

  • शिकायत और मांग का सत्यापन: कब, कैसे और किसके सामने कथित मांग हुई।​
  • धनराशि का ट्रेल: रिश्वत की रकम की व्यवस्था कैसे हुई और किस चैनल से दी गई।​
  • सह-आरोपियों की भूमिका: PAs/अन्य लोगों की कथित भागीदारी।​
  • विभागीय कामकाज का रिकॉर्ड: किस काम के बदले रिश्वत मांगी गई, फाइल मूवमेंट और आदेश।​

इन सवालों के जवाब जांच के दौरान सामने आएंगे और उसके बाद आगे की कानूनी कार्रवाई तय होगी।​

FAQs (5)

  1. किस BJP विधायक को ₹5 लाख रिश्वत लेते पकड़ा गया?
    लोकायुक्त के मुताबिक, BJP विधायक चंद्रू लामाणी को ₹5 लाख की रिश्वत लेते कथित तौर पर रंगेहाथ पकड़ा गया।​
  2. यह ट्रैप किसने और कहाँ लगाया?
    गडग लोकायुक्त पुलिस ने एक ठेकेदार की शिकायत के आधार पर ट्रैप लगाया।​
  3. शिकायतकर्ता कौन है और रिश्वत किस काम के बदले मांगी गई थी?
    शिकायतकर्ता विजय पुजार हैं (क्लास‑I ठेकेदार)। लोकायुक्त के अनुसार रिश्वत माइनर इरिगेशन विभाग के कामों से जुड़ी थी, जिसमें रिटेनिंग वॉल निर्माण जैसे कार्य शामिल बताए गए।​
  4. विधायक पर कुल कितनी रिश्वत मांगने का आरोप है?
    लोकायुक्त के मुताबिक, आरोपी ने कुल ₹11 लाख मांगे थे और ट्रैप के दौरान ₹5 लाख स्वीकार किए गए।​
  5. इस केस में किन धाराओं के तहत कार्रवाई हुई है?
    लोकायुक्त के अनुसार, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7(a) पढ़ी गई 7(A) के तहत मामला दर्ज किया गया है।​

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