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छत्तीसगढ़ शराब घोटाले में भूपेश बघेल के बेटे को बेल: HC ने ED-ACB केस में दी राहत, ‘राजनीतिक प्रभाव’ तर्क खारिज!

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Chhattisgarh liquor scam, Chaitanya Baghel bail Chhattisgarh HC
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छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पूर्व CM भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य को ED और ACB के शराब घोटाला केसों में जमानत दी। कोर्ट ने कहा उनकी भूमिका छोटी, बड़े आरोपी पहले बेल पर। राजनीतिक प्रभाव का तर्क खारिज, ट्रायल में जांच होगी।

भूपेश बघेल के बेटे को डबल बेल: 1000 करोड़ के शराब घोटाले में HC का फैसला, जांच को झटका?

छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: HC ने पूर्व CM भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य को दो केसों में जमानत दी

बिलासपुर की छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने शुक्रवार को पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को दो बड़े मामलों में जमानत दे दी। ये मामले प्रवर्तन निदेशालय (ED) और छत्तीसगढ़ एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB)/इकोनॉमिक ऑफेंस विंग (EOW) से जुड़े हैं, जो राज्य के कथित शराब घोटाले से संबंधित हैं। जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा की सिंगल बेंच ने 12 दिसंबर को सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रखा था।​

ED के वकील सौरभ कुमार पांडे ने पुष्टि की कि चैतन्य को दोनों मामलों में जमानत मिल गई। कोर्ट ने शर्तें लगाईं: पासपोर्ट जमा करना, ट्रायल कोर्ट में नियमित हाजिरी, मामले के शीघ्र निपटारे में सहयोग। शर्त तोड़ी तो जमानत रद्द हो सकती है।​

ED मामले में जमानत: ‘भूमिका छोटी, बड़े आरोपी पहले बेल पर’

ED केस में कोर्ट ने कहा कि चैतन्य की कथित भूमिका कई वरिष्ठ आरोपियों से काफी कम है। मुख्य आरोपी और लाभार्थी – अनवर धेबर, अनिल तुतेजा, अरविंद सिंह, अरुणपति त्रिपाठी और त्रिलोक सिंह ढिल्लों – सुप्रीम कोर्ट से पहले ही जमानत पर बाहर हैं। चैतन्य को बेल न देने से ‘पैरिटी का सिद्धांत’ टूटेगा।​

जांच मुख्यतः डॉक्यूमेंट्री है। चैतन्य लंबे समय से जेल में थे। ED के सबूत – PMLA की धारा 50 के स्टेटमेंट्स, फाइनेंशियल और डिजिटल रिकॉर्ड्स – का मूल्यांकन ट्रायल में होगा, बेल स्टेज पर अंतिम नहीं। ED का राजनीतिक प्रभाव वाला तर्क नोट किया लेकिन ठुकराया – कोई ठोस सबूत नहीं कि चैतन्य ने गवाहों को प्रभावित या जांच बाधित किया।​

कोर्ट ने साफ कहा: आरोपों की गंभीरता अकेले लंबी हिरासत का आधार नहीं, खासकर जब ट्रायल सालों चलेगा। ED के दस्तावेजों में चैतन्य के नाम पर कोई बैंक अकाउंट, प्रॉपर्टी या ऑफिशियल कम्युनिकेशन नहीं जो क्राइम प्रोसीड्स जेनरेशन दिखाए। आरोप मुख्यतः स्टेटमेंट्स और प्रभाव/निकटता पर, कंक्रीट एक्ट्स पर नहीं।​

ACB/EOW मामले में जमानत: IO पर कोर्ट की फटकार

ACB/EOW केस में कोर्ट ने जांच अधिकारी (IO) पर सख्ती दिखाई। आरोपी लक्ष्मी नारायण बंसल के खिलाफ स्पेशल कोर्ट का स्थायी वारंट था, फिर भी IO ने सिर्फ स्टेटमेंट लिया और गिरफ्तारी नहीं की। कोर्ट ने इसे “कानून का घोर उल्लंघन” कहा। DGP को निर्देश: ऐसी घटनाओं को रोकने के आदेश दें।​

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि टिप्पणियां सिर्फ बेल पर हैं, केस के मेरिट्स पर नहीं।​

शराब घोटाले का बैकग्राउंड: 3500 करोड़ का कांड

ED का दावा: 2019-2022 में भूपेश बघेल सरकार के दौरान शराब सिंडिकेट चला। राज्य को भारी नुकसान, सिंडिकेट को फायदा। चैतन्य सिंडिकेट के शीर्ष पर, करीब 1000 करोड़ हैंडल किए। ACB का कहना: चैतन्य को 200-250 करोड़ शेयर मिला। कुल प्रोसीड्स 3500 करोड़ से ज्यादा।​

ED ने 18 जुलाई 2024 को चैतन्य को गिरफ्तार किया। ACB ने जेल से ही 24 सितंबर को गिरफ्तार किया। वकील ने कहा: ED ने PMLA धारा 19 का दुरुपयोग किया, स्टेटमेंट्स जबरन और विरोधाभासी। बंसल के स्टेटमेंट्स वारंट के बाद लिए गए।​

मुख्य आरोपी और बेल स्टेटस

  • अनवर धेबर, अनिल तुतेजा आदि: SC से बेल
  • चैतन्य बघेल: HC से बेल (दोनों केस)
  • अन्य: जांच जारी
आरोपीभूमिका (ED दावा)बेल स्टेटस
चैतन्य बघेलसिंडिकेट शीर्ष, 1000 Cr हैंडलHC बेल
अनवर धेबरकिंगपिनSC बेल
लक्ष्मी नारायण बंसलआरोपीफरार? IO लापरवाही

राजनीतिक प्रभाव

कांग्रेस नेता भूपेश बघेल ने इसे राजनीतिक साजिश बताया। BJP सरकार ने घोटाला उजागर कर कांग्रेस को घेरा। बेल से कांग्रेस को राहत, लेकिन ट्रायल लंबा चलेगा। छत्तीसगढ़ में राजनीतिक बहस तेज।​

PMLA बेल के नियम

PMLA में बेल कठिन, लेकिन HC ने पैरिटी, लंबी हिरासत, सबूत ट्रायल में टेस्ट पर जोर दिया। सुप्रीम कोर्ट के अरुण कटियाल जजमेंट का हवाला।​

अगला क्या?

ट्रायल कोर्ट में हाजिरी जरूरी। अगर सबूत कमजोर साबित हुए तो केस कमजोर हो सकता। ED अपील कर सकता। घोटाले की जांच जारी।​

5 FAQs

  1. छत्तीसगढ़ HC ने चैतन्य बघेल को किन मामलों में जमानत दी?
    ED के मनी लॉन्ड्रिंग केस और ACB/EOW के भ्रष्टाचार केस में जमानत मिली।​
  2. कोर्ट ने ED के राजनीतिक प्रभाव वाले तर्क को क्यों खारिज किया?
    कोई ठोस सबूत नहीं कि चैतन्य ने गवाहों को प्रभावित या जांच रोकी।​
  3. ACB केस में IO पर क्या टिप्पणी?
    लक्ष्मी नारायण बंसल को वारंट के बावजूद गिरफ्तार न करने को कानून का घोर उल्लंघन कहा।​
  4. शराब घोटाले का आकार क्या?
    ED: 3500 Cr+ प्रोसीड्स, 2019-22 भूपेश सरकार के दौरान।​
  5. जमानत की मुख्य शर्तें क्या?
    पासपोर्ट जमा, ट्रायल कोर्ट में हाजिरी, सहयोग। उल्लंघन पर रद्द।​

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