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मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने 197 विकास योजनाओं की दी सौगात.

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मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन सेरेंगसिया के शहीदों को नमन- सह – परियोजनाओं के शिलान्यास – उद्घाटन एवं परिसंपत्ति वितरण समारोह में हुए शामिल, शहीद स्मारक पर माल्यार्पण कर अमर वीर शहीदों को किया नमन, दी श्रद्धांजलि

मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर  398  करोड़ 19 लाख 35 हज़ार 298 रुपए की लागत से 197 विकास योजनाओं की दी सौगात, 3 लाख 77 हजार 256 लाभार्थियों के बीच 637 करोड़ 43 लाख 13 हज़ार 500 रुपए की बांटी परिसंपत्तियां, 1479 युवाओं को मिला नियुक्ति पत्र

मुख्यमंत्री ने कहा- अपने वीर शहीदों का सम्मान हमारी परंपरा में शामिल, इसे और मजबूती से बढ़ा रहे आगे

मुख्यमंत्री ने कहा- हमारे पूर्वजों ने अपनी पहचान, जल – जंगल- जमीन की रक्षा और अंग्रेजों  के खिलाफ संघर्ष में अपना सब कुछ कर दिया था न्योछावर

मुख्यमंत्री ने कहा – जब तक आर्थिक, सामाजिक, शैक्षणिक और बौद्धिक रूप से मजबूत नहीं होंगे तब तक आगे नहीं बढ़ेंगे

●  अंग्रेजों के खिलाफ महासंग्राम में शहादत देने वाले  वीर महानायकों को शत – शत नमन

● हम सभी अपने अमर वीर शहीदों के  आदर्शों और सपनों को पूरा करने का संकल्प लें

● झारखंड राज्य विकास के हर मोर्चे पर तेज गति से बढ़ रहा है

● आधी आबादी को बना रहे हैं सशक्त और आत्मनिर्भर

  • हेमन्त सोरेन, मुख्यमंत्री, झारखंड

पश्चिमी सिंहभूम :  आज का दिन हम सभी के लिए काफी महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक है। हर वर्ष की भांति इस बार भी शूरवीरों की धरती – सेरेंगसिया  में अपने अमर वीर शहीदों को नमन और श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए एकत्रित हुए हैं। यह दिन हमें अपने वीरों के बलिदान की गाथा को याद दिलाता है । इस अवसर पर हम सभी अपने अमर वीर शहीदों के आदर्श और सपनों को पूरा करने का संकल्प लें। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पश्चिमी सिंहभूम जिला अंतर्गत टोटो प्रखंड में सेरेंगसिया के शहीदों को नमन- सह – परियोजनाओं के शिलान्यास- उद्घाटन एवं परिसंपत्ति वितरण समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने सेरेंगसिया शहीद स्मारक पर शीश नवाकर अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ हुए संघर्ष के महानायक पोटो हो समेत तमाम वीर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की।

  झारखंड हमेशा से शूरवीरों की धरती रही है

मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड हमेशा से शूरवीरों की धरती रही है। साल का कोई भी ऐसा दिन नहीं होता है, जब हम किसी ना किसी वीर शहीद का शहादत दिवस मनाते हैं। अपने वीर शहीदों का सम्मान हमारी परंपरा में शामिल है। इस परंपरा को हम और मजबूती से आगे बढ़ा रहे हैं ताकि हमारे पूर्वजों में जो शहादत दी थी, उसे आने वाली पीढ़ी को बता सकें।

जब आजादी की लड़ाई शुरू भी नहीं हुई थी,  तब यहां के आदिवासियों ने अंग्रेजों से लोहा लिया था

मुख्यमंत्री ने कहा कि जब देश में आजादी की लड़ाई शुरू भी नहीं हुई थी उस वक्त हमारे पूर्वजों ने अंग्रेजों से लोहा लिया था। कोल्हान का कोल विद्रोह इतिहास के पन्नों में दर्ज है, क्योंकि हमारे आदिवासी और पूर्वजों ने अपनी पहचान, जल – जंगल- जमीन की रक्षा और अंग्रेजों के अन्याय, शोषण और जुल्म के खिलाफ संघर्ष में अपना सब कुछ  न्योछावर कर दिया था। संघर्षों के महानायक भगवान बिरसा मुंडा, सिदो कान्हु, नीलांबर पीतांबर और पोटो हो जैसे अनेकों वीरों और उनकी शहादत की गवाह यह धरती रही है।

 विकास के हर मोर्चे पर तेज गति से बढ़ रहे आगे

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार हेडक्वार्टर से नहीं, गांवों से चल रही है। आज सरकार और उसकी योजनाएं समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंच रही है। लोगों की समस्याओं का त्वरित समाधान हो रहा है। हमारी सरकार की नीतियों और योजनाओं का सकारात्मक परिणाम देखने को मिल रहा है। आज झारखंड विकास के हर मोर्चे पर तेज गति से आगे बढ़ रहा है।

 सामाजिक, आर्थिक,  शैक्षणिक और बौद्धिक रूप से मजबूत होना होगा

मुख्यमंत्री ने कहा कि जब तक आप आर्थिक, सामाजिक, शैक्षणिक और बौद्धिक रूप से मजबूत नहीं होंगे तब तक आगे नहीं बढ़ सकते हैं।  यही वजह है कि हमारी सरकार हर किसी को इस दृष्टिकोण से सशक्त बनाने का प्रयास कर रही है।  उन्होंने ग्रामीणों से कहा कि वे अपने बच्चे- बच्चियों को हर हाल में पढ़ाएं। इसमें सरकार आपको हर स्तर पर सहयोग करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि  गरीब और जरूरतमंद बच्चों को अच्छी शिक्षा मिले, इसके लिए कई योजनाएं चल रही है। आज हम बच्चों को निजी विद्यालयों की तर्ज पर उत्कृष्ट शिक्षा दे रहे हैं। उन्हें मेडिकल और इंजीनियरिंग समेत अन्य प्रतियोगिता परीक्षाओं की तैयारी के लिए निः शुल्क कोचिंग दी जा रही है। विदेशों में उच्च शिक्षा के लिए शत प्रतिशत स्कॉलरशिप दी जा रही है। हमारी कोशिश यही है यहां के  बच्चे भी ऊंचे पदों पर पहुंच सके।

 आधी आबादी को बना रहे आत्मनिर्भर

मुख्यमंत्री ने कहा कि आधी आबादी को सशक्त एवं आत्मनिर्भर बनाना  हमारा संकल्प है। मुख्यमंत्री मइंया सम्मान योजना  इसी कड़ी का एक अहम हिस्सा है। इस योजना के माध्यम से 18 से 50 वर्ष तक की महिलाओं को हर वर्ष तीस हजार रुपए दे रहे हैं ताकि वे अपने बल पर अपने को खड़ा कर सकें। ऐसी ही कई और योजनाएं हैं, जिनके जरिए हम राज्य वासियों को सहूलियत और सुविधाएं उपलब्ध करा रहे हैं।

 197 विकास योजनाओं की दी सौगात

मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर 398  करोड़ 19 लाख 35 हज़ार 298 रुपए की लागत से 197 विकास योजनाओं का उद्घाटन- शिलान्यास किया. इसमें 224 करोड़ 78 लाख 77 हज़ार 843 रुपए की लागत से 122 योजनाओं का शिलान्यास एवं 173 करोड़ 40 लाख 57 हज़ार 405 रुपए की लागत से 75 महत्वाकांक्षी योजनाओं का उद्घाटन शामिल है। इसके साथ विभिन्न विभागों से संबंधित योजनाओं के 3 लाख 77 हजार 256 लाभार्थियों के बीच 637 करोड़ 43 लाख 13 हज़ार 500  रुपए की परिसंपत्तियां बांटी. इसके अलावा 1479 युवाओं को नियुक्ति पत्र प्रदान किया। 

 इस अवसर पर मंत्री दीपक बिरुवा,  सांसद जोबा मांझी, विधायक निरल पूर्ति, विधायक दशरथ गागरई, विधायक सुखराम उरांव, विधायक सोनाराम सिंकू, विधायक सविता महतो,  विधायक समीर मोहंती, विधायक संजीव सरदार, विधायक जगत मांझी, विधायक सोमेश चंद्र सोरेन, जिला परिषद अध्यक्ष लक्ष्मी सुरीन, पुलिस उप महानिरीक्षक अनुरंजन  किस्पोट्टा तथा जिले के उपायुक्त चंदन कुमार, पुलिस अधीक्षक अमित रेणु  उपस्थित रहे।

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Written by
Yudhishthir Mahato

युधिष्ठिर महतो | पत्रकार एवं लेखक युधिष्ठिर महतो वर्ष 2017 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय पत्रकार, लेखक, गीतकार और जनसंपर्क पेशेवर हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत रिपोर्टर के रूप में की और समाचार पत्रों, न्यूज़ पोर्टलों तथा टीवी चैनलों में काम करते हुए मीडिया के विभिन्न प्रारूपों में अनुभव हासिल किया। वे झारखंड क्रांति खबर में उप-संपादक के रूप में भी कार्य कर चुके हैं। वर्तमान में वे पत्रकारिता के साथ जनसंपर्क एवं संचार कार्य से जुड़े हैं और धनबाद तथा झारखंड से संबंधित सामाजिक, राजनीतिक, प्रशासनिक एवं जनसरोकार के मुद्दों पर लगातार लिखते हैं। Aaryaa News पर उनके नाम से प्रकाशित खबरों में स्थानीय घटनाक्रम से लेकर राज्य की महत्वपूर्ण राजनीतिक एवं सामाजिक गतिविधियां शामिल हैं। उन्होंने बिनोद बिहारी महतो कोयलांचल विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एम.ए. किया है। पत्रकारिता के साथ उन्हें साहित्य और रचनात्मक लेखन में भी विशेष रुचि है। वे हिंदी और खोरठा में गीत एवं कविताएं लिखते हैं और उनके लिखे कई गीत विभिन्न ऑडियो प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हैं। पत्रकारिता, जनसंपर्क और रचनात्मक लेखन—इन तीनों क्षेत्रों में सक्रियता युधिष्ठिर महतो की पेशेवर पहचान को अलग आयाम देती है।

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