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सिंदूर खेला और कलश विसर्जन के साथ संपन्न हुई दुर्गा पूजा

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धनबाद। विजयादशमी के अवसर पर मां दुर्गा की विदाई शहर में भक्ति, उल्लास और परंपरा का संगम बनी। हीरापुर हरी मंदिर एवं दुर्गा मंदिर परिसर में दशमी पूजा के बाद महिलाओं ने पारंपरिक “सिंदूर खेला” का आयोजन किया। सुहागिन महिलाओं ने मां दुर्गा को सिंदूर अर्पित कर एक-दूसरे की मांग सजाई और अखंड सौभाग्य व पतियों की लंबी आयु की मंगलकामनाएं कीं। इस दौरान लाल परिधानों में सजी महिलाएं उत्साहपूर्वक नृत्य करती नजर आईं।

“सिंदूर खेला” सदियों पुरानी परंपरा है, जो मां दुर्गा की विदाई के साथ जुड़ी है। इसका उद्देश्य देवी का आशीर्वाद लेकर वैवाहिक जीवन की खुशहाली और परिवार की समृद्धि की कामना करना होता है।

दूसरी ओर, दशमी पर घट विसर्जन का कार्यक्रम भी उमंग और आस्था के बीच सम्पन्न हुआ। बारिश की फुहारों के बावजूद भारी संख्या में श्रद्धालु ढोल-नगाड़ों और डीजे की धुन पर थिरकते हुए जुलूस की शक्ल में निकले। गाजे-बाजे के बीच तालाब पहुंचकर मां दुर्गा के कलश का विधिवत विसर्जन किया गया। इस दौरान “बोलो दुर्गा मां की जय” के गगनभेदी जयघोष से पूरा वातावरण गूंज उठा।

इन धार्मिक अनुष्ठानों के साथ ही नौ दिनों तक चले दुर्गा पूजा महोत्सव का समापन हुआ। श्रद्धालुओं ने विश्वास जताया कि मां दुर्गा का आशीर्वाद उनके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लेकर आएगा।

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Written by
Yudhishthir Mahato

युधिष्ठिर महतो | पत्रकार एवं लेखक युधिष्ठिर महतो वर्ष 2017 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय पत्रकार, लेखक, गीतकार और जनसंपर्क पेशेवर हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत रिपोर्टर के रूप में की और समाचार पत्रों, न्यूज़ पोर्टलों तथा टीवी चैनलों में काम करते हुए मीडिया के विभिन्न प्रारूपों में अनुभव हासिल किया। वे झारखंड क्रांति खबर में उप-संपादक के रूप में भी कार्य कर चुके हैं। वर्तमान में वे पत्रकारिता के साथ जनसंपर्क एवं संचार कार्य से जुड़े हैं और धनबाद तथा झारखंड से संबंधित सामाजिक, राजनीतिक, प्रशासनिक एवं जनसरोकार के मुद्दों पर लगातार लिखते हैं। Aaryaa News पर उनके नाम से प्रकाशित खबरों में स्थानीय घटनाक्रम से लेकर राज्य की महत्वपूर्ण राजनीतिक एवं सामाजिक गतिविधियां शामिल हैं। उन्होंने बिनोद बिहारी महतो कोयलांचल विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एम.ए. किया है। पत्रकारिता के साथ उन्हें साहित्य और रचनात्मक लेखन में भी विशेष रुचि है। वे हिंदी और खोरठा में गीत एवं कविताएं लिखते हैं और उनके लिखे कई गीत विभिन्न ऑडियो प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हैं। पत्रकारिता, जनसंपर्क और रचनात्मक लेखन—इन तीनों क्षेत्रों में सक्रियता युधिष्ठिर महतो की पेशेवर पहचान को अलग आयाम देती है।

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