Home झारखण्ड टुंडी में बनेगा कल्याण गुरुकुल, हुनरमंद बन युवा बनेंगे आत्मनिर्भर।
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टुंडी में बनेगा कल्याण गुरुकुल, हुनरमंद बन युवा बनेंगे आत्मनिर्भर।

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धनबाद । उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी आदित्य रंजन की अध्यक्षता में टुंडी के अनुसूचित जनजाति बालक छात्रावास के हस्तांतरण को लेकर बैठक आयोजित की गई। बैठक में बालक छात्रावास को कल्याण गुरुकुल बनाने के निर्णय पर उपायुक्त द्वारा सहमति दी गई।

उपायुक्त ने कहा कि कल्याण गुरुकुल, झारखंड सरकार के कल्याण विभाग की एक प्रमुख पहल है। इसमें ग्रामीण, गरीब और पिछड़े युवाओं को नि:शुल्क आवासीय प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण के बाद युवाओं को प्लेसमेंट भी दिया जाएगा। यह युवाओं को हुनरमंद बनाकर आत्मनिर्भर बनाने के लिए राज्य सरकार की अभिनव पहल है। इसमें छात्रों को आवासीय प्रशिक्षण, रहने और खाने की नि:शुल्क व्यवस्था प्रदान की जाएगी।

उन्होंने बताया कि झारखंड के खूंटी (डोरमा), रांची (बुंडू), जमशेदपुर (धानचातनी), गिरिडीह और हजारीबाग (गोबरबंधा) में कल्याण गुरुकुल का सफलतापूर्वक संचालन किया जा रहा है। इसमें 45 दिन के प्रशिक्षण के बाद युवाओं को सीधे रोजगार मिलता है।

बैठक में उपायुक्त आदित्य रंजन, प्रभारी कल्याण पदाधिकारी जियाउल अंसारी, जिला शिक्षा पदाधिकारी अभिषेक झा मौजूद थे।

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Written by
Yudhishthir Mahato

युधिष्ठिर महतो | पत्रकार एवं लेखक युधिष्ठिर महतो वर्ष 2017 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय पत्रकार, लेखक, गीतकार और जनसंपर्क पेशेवर हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत रिपोर्टर के रूप में की और समाचार पत्रों, न्यूज़ पोर्टलों तथा टीवी चैनलों में काम करते हुए मीडिया के विभिन्न प्रारूपों में अनुभव हासिल किया। वे झारखंड क्रांति खबर में उप-संपादक के रूप में भी कार्य कर चुके हैं। वर्तमान में वे पत्रकारिता के साथ जनसंपर्क एवं संचार कार्य से जुड़े हैं और धनबाद तथा झारखंड से संबंधित सामाजिक, राजनीतिक, प्रशासनिक एवं जनसरोकार के मुद्दों पर लगातार लिखते हैं। Aaryaa News पर उनके नाम से प्रकाशित खबरों में स्थानीय घटनाक्रम से लेकर राज्य की महत्वपूर्ण राजनीतिक एवं सामाजिक गतिविधियां शामिल हैं। उन्होंने बिनोद बिहारी महतो कोयलांचल विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एम.ए. किया है। पत्रकारिता के साथ उन्हें साहित्य और रचनात्मक लेखन में भी विशेष रुचि है। वे हिंदी और खोरठा में गीत एवं कविताएं लिखते हैं और उनके लिखे कई गीत विभिन्न ऑडियो प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हैं। पत्रकारिता, जनसंपर्क और रचनात्मक लेखन—इन तीनों क्षेत्रों में सक्रियता युधिष्ठिर महतो की पेशेवर पहचान को अलग आयाम देती है।

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