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जंगली हाथियों का आतंक, 46 वर्षीय व्यक्ति की मौत

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टंडवा (चतरा) । टंडवा प्रखंड के बड़गांव के महुआ पतरा टोला में एक दुःखद घटना घटी।जहां जंगली हाथियों के झुंड ने रात्रि को 46 वर्षीय नकुल उरांव पर हमला कर दिया। इस हमले में नकुल उरांव की घटनास्थल पर ही मौत हो गई। मिली जानकारी के अनुसार, लगभग 20 जंगली हाथियों का एक झुंड महुआ पतरा टोला में घुस आया था और घर से भागना भी मुश्किल कर दिया। इसी दौरान हाथियों ने नकुल उरांव पर हमला कर दिया और उन्हें पटक कर मार डाला। घटना के बाद पूरे गांव में दहशत का माहौल है। ग्रामीणों ने बताया कि हाथियों के झुंड ने गांव में काफी उत्पात मचाया। हाथियों के हमले से नकुल उरांव की मौत हो गई। ग्रामीणों ने वन विभाग से मांग की है कि उन्हें जल्द से जल्द मुआवजा दिया जाए और हाथियों के आतंक से बचाने के लिए उचित कदम उठाए जाये।

वन विभाग की टीम को घटनास्थल की जानकारी दे दी गई है। वन विभाग ने मृतक के परिवार को तत्काल सहायता के रूप में सहयोग करेगी।

नकुल उरांव की मौत से उनके परिवार में शोक का माहौल है। परिवार के सदस्यों ने प्रशासन से मांग की है कि उन्हें जल्द से जल्द न्याय दिया जाए और हाथियों के आतंक से बचाने के लिए उचित कदम उठाए जाएं।

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Written by
Yudhishthir Mahato

युधिष्ठिर महतो | पत्रकार एवं लेखक युधिष्ठिर महतो वर्ष 2017 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय पत्रकार, लेखक, गीतकार और जनसंपर्क पेशेवर हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत रिपोर्टर के रूप में की और समाचार पत्रों, न्यूज़ पोर्टलों तथा टीवी चैनलों में काम करते हुए मीडिया के विभिन्न प्रारूपों में अनुभव हासिल किया। वे झारखंड क्रांति खबर में उप-संपादक के रूप में भी कार्य कर चुके हैं। वर्तमान में वे पत्रकारिता के साथ जनसंपर्क एवं संचार कार्य से जुड़े हैं और धनबाद तथा झारखंड से संबंधित सामाजिक, राजनीतिक, प्रशासनिक एवं जनसरोकार के मुद्दों पर लगातार लिखते हैं। Aaryaa News पर उनके नाम से प्रकाशित खबरों में स्थानीय घटनाक्रम से लेकर राज्य की महत्वपूर्ण राजनीतिक एवं सामाजिक गतिविधियां शामिल हैं। उन्होंने बिनोद बिहारी महतो कोयलांचल विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एम.ए. किया है। पत्रकारिता के साथ उन्हें साहित्य और रचनात्मक लेखन में भी विशेष रुचि है। वे हिंदी और खोरठा में गीत एवं कविताएं लिखते हैं और उनके लिखे कई गीत विभिन्न ऑडियो प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हैं। पत्रकारिता, जनसंपर्क और रचनात्मक लेखन—इन तीनों क्षेत्रों में सक्रियता युधिष्ठिर महतो की पेशेवर पहचान को अलग आयाम देती है।

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