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जर्जर और क्षतिग्रस्त पुल की रेलिंग दे रहीं हैं दुर्घटना को दस्तक

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The dilapidated and damaged bridge railings are an accident waiting to happen.
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धनबाद : जिला के भूली तेतुलमारी पथ पर स्थित स्वर्गीय बिनोद बिहारी महतो सेतु की जर्जर और क्षतिग्रस्त रेलिंग दुर्घटना को दस्तक दे रहीं हैं। सड़क कई बार बनीं, लेकिन पुल के रेलिंग की मरम्मत नहीं हुई। विधायक निधि द्वारा जिला परिषद धनबाद के सौजन्य से 16 फरवरी 2003 को इस पुल का उद्घाटन तत्कालीन टुंडी विधायक डॉ सबा अहमद के द्वारा किया गया था। उस समय धनबाद के उप विकास आयुक्त नरसिंह उपाध्याय और उपायुक्त नितिन कुलकर्णी थे। ज्ञात हो कि इस पुल से होकर काफी संख्या में प्रतिदिन वाहनों का आवागमन होता हैं। आस – पास घनी आबादी क्षेत्र हैं। बावजूद इसके इस पर न स्थानीय जनप्रतिनिधि ने कभी ध्यान दिया और न ही विभागीय पदाधिकारियों ने इस पर कोई पहल की हैं। बता दें कि इस पुल पर पहले सड़क दुर्घटना भी हो चुकी हैं। जिसके कारण पुल का रेलिंग टूट चुका हैं और बांस का सहारा दिया गया हैं। पुल की रेलिंग काफी जर्जर और क्षतिग्रस्त स्थिति में हैं, कल को कभी भी बड़ी दुर्घटना घट सकती हैं।

मुखिया भीम लाल रजक ने कहा कि इसकी मरम्मत को लेकर पहल करने की जरूरत हैं। जिससे किसी को जान – माल की क्षति न हो। साथ ही रेलिंग की ऊंचाई भी थोड़ा बढ़ाने की जरूरत हैं। चूंकि, पुल के अनुसार रेलिंग की ऊंचाई होने से सुरक्षा ज्यादा होगी।


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Written by
Yudhishthir Mahato

युधिष्ठिर महतो | पत्रकार एवं लेखक युधिष्ठिर महतो वर्ष 2017 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय पत्रकार, लेखक, गीतकार और जनसंपर्क पेशेवर हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत रिपोर्टर के रूप में की और समाचार पत्रों, न्यूज़ पोर्टलों तथा टीवी चैनलों में काम करते हुए मीडिया के विभिन्न प्रारूपों में अनुभव हासिल किया। वे झारखंड क्रांति खबर में उप-संपादक के रूप में भी कार्य कर चुके हैं। वर्तमान में वे पत्रकारिता के साथ जनसंपर्क एवं संचार कार्य से जुड़े हैं और धनबाद तथा झारखंड से संबंधित सामाजिक, राजनीतिक, प्रशासनिक एवं जनसरोकार के मुद्दों पर लगातार लिखते हैं। Aaryaa News पर उनके नाम से प्रकाशित खबरों में स्थानीय घटनाक्रम से लेकर राज्य की महत्वपूर्ण राजनीतिक एवं सामाजिक गतिविधियां शामिल हैं। उन्होंने बिनोद बिहारी महतो कोयलांचल विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एम.ए. किया है। पत्रकारिता के साथ उन्हें साहित्य और रचनात्मक लेखन में भी विशेष रुचि है। वे हिंदी और खोरठा में गीत एवं कविताएं लिखते हैं और उनके लिखे कई गीत विभिन्न ऑडियो प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हैं। पत्रकारिता, जनसंपर्क और रचनात्मक लेखन—इन तीनों क्षेत्रों में सक्रियता युधिष्ठिर महतो की पेशेवर पहचान को अलग आयाम देती है।

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