केंदुआ के बाद अब झरिया-सिंदरी-बलियापुर मुख्य मार्ग पर महाखतरा, 44 करोड़ की सड़क एक साल में ही धंसी
धनबाद : कोयलांचल में भू-धंसान और अनियोजित खनन का संकट गहराता जा रहा है। पिछले सात महीनों से बंद पड़े केंदुआ मुख्य मार्ग के बाद अब झरिया-सिंदरी-बलियापुर मुख्य मार्ग पर भी बड़ा खतरा मंडराने लगा है। करीब 44 करोड़ रुपये की लागत से बनी यह चमचमाती सड़क निर्माण के महज एक साल के भीतर ही कई जगहों से उखड़ गई है। सड़क के बीचोबीच खतरनाक दरारें और धंसान के निशान साफ देखे जा सकते हैं, जिससे स्थानीय लोगों में दहशत का माहौल है।
भारी ब्लास्टिंग और खनन से दरकी सड़क
स्थानीय ग्रामीणों और व्यापारियों का सीधा आरोप है कि BCCL की कुजामा परियोजना में लगातार हो रही हैवी ब्लास्टिंग और खनन गतिविधियों के कारण सड़क की यह दुर्दशा हुई है।
- भारी वाहनों के लगातार गुजरने से खतरा हर मिनट बढ़ रहा है।
- सड़क का डामर पूरी तरह उखड़ चुका है और इसकी नींव कमजोर हो गई है।
- लोगों को डर है कि अगर जल्द ही ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह मार्ग भी केंदुआ रोड की तरह पूरी तरह बंद हो जाएगा, जिससे हजारों लोगों की आवाजाही और व्यापार ठप पड़ जाएगा।
💬 राजनीतिक घमासान: जांच की उठी मांग
सड़क की इस बदहाली को लेकर अब सियासत भी गरमा गई है और निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं:
“44 करोड़ की लागत से बनी सड़क 44 दिन भी ठीक से नहीं टिक सकी। निर्माण में भारी अनियमितता बरती गई है, इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए।”
— रागिनी सिंह, विधायक (झरिया)
“सड़क निर्माण में गंभीर तकनीकी गड़बड़ी और गलत एलाइनमेंट का सहारा लिया गया है। इस भ्रष्टाचार की निष्पक्ष जांच जरूरी है।”
— संजीव सिंह, मेयर (धनबाद)
जिम्मेदारी को लेकर असमंजस, प्रशासन ने कड़े किए तेवर
एक तरफ जहाँ पथ निर्माण विभाग और BCCL के बीच मरम्मत की जिम्मेदारी को लेकर फाइलें घूम रही थीं, वहीं अब प्रशासन रेस नजर आ रहा है।
धनबाद के उपायुक्त (DC) आदित्य रंजन ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा:
- पथ निर्माण विभाग ने सड़क की मरम्मत के लिए एक विस्तृत प्राक्कलन (Estimate) तैयार कर लिया है।
- इस प्राक्कलन को फंड जारी करने के लिए BCCL के पास भेज दिया गया है।
- जैसे ही BCCL से राशि (Funds) प्राप्त होगी, युद्ध स्तर पर मरम्मत का कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
आगे की राह
झरिया-सिंदरी मुख्य मार्ग की इस हालत ने एक बार फिर धनबाद में विकास कार्यों की गुणवत्ता और बेतरतीब खनन नीतियों को कटघरे में खड़ा कर दिया है। अब देखना यह है कि BCCL कब तक राशि आवंटित करता है और जांच की सुई किस ओर घूमती है। यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो धनबाद की एक बड़ी आबादी को भारी संकट का सामना करना पड़ेगा।
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