Home झारखण्ड रिम्स-2 निर्माण का विरोध तेज : बाबूलाल मरांडी का सरकार पर निशाना, कहा- ‘सड़क से सदन तक लड़ेंगे’
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रिम्स-2 निर्माण का विरोध तेज : बाबूलाल मरांडी का सरकार पर निशाना, कहा- ‘सड़क से सदन तक लड़ेंगे’

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Opposition to RIMS-2 construction intensifies: Babulal Marandi targets the government, vows to fight "from the streets to the House."
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रांची : झारखंड की राजधानी रांची के नगड़ी में प्रस्तावित रिम्स-2 (RIMS-2) के निर्माण को लेकर स्थानीय ग्रामीणों का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। ‘नगड़ी जमीन बचाओ संघर्ष समिति’ के बैनर तले चल रहा यह आंदोलन अब राजनीतिक रूप से भी तूल पकड़ने लगा है। गुरुवार को संघर्ष समिति के एक प्रतिनिधिमंडल ने नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी से मुलाकात कर इस मामले में हस्तक्षेप और सहयोग की मांग की।

ग्रामीणों ने बाबूलाल मरांडी को पूरे विवाद की विस्तृत जानकारी दी और बताया कि किस तरह उनकी उपजाऊ कृषि भूमि को इस परियोजना के लिए अधिग्रहित करने का प्रयास किया जा रहा है।

सरकार की हठधर्मिता पर बरसे बाबूलाल मरांडी

मुलाकात के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्य सरकार की नीति पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने सरकार पर तानाशाही और हठधर्मिता का आरोप लगाते हुए कहा:

“राज्य सरकार विकास के नाम पर किसानों को उजाड़ने पर आमादा है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पूरी मजबूती के साथ नगड़ी के ग्रामीणों और किसानों के साथ खड़ी है। इस अन्याय के खिलाफ पार्टी सड़क से लेकर सदन (विधानसभा) तक पुरजोर विरोध करेगी। अगर जरूरत पड़ी, तो मैं खुद जमीन पर उतरकर इस आंदोलन का नेतृत्व करूँगा।”

मरांडी ने सरकार को दिए दो अहम सुझाव:

  1. बंजर भूमि का हो उपयोग: रिम्स-2 का निर्माण किसानों की उपजाऊ और कृषि योग्य भूमि पर करने के बजाय राज्य में बेकार पड़ी बंजर जमीनों पर किया जाना चाहिए।
  2. मौजूदा स्वास्थ्य ढांचे में सुधार: सरकार को नया ढांचा खड़ा करने से पहले विभिन्न जिलों में पहले से संचालित अस्पतालों की बदहाल स्थिति को सुधारना चाहिए और अधूरे पड़े अस्पताल भवनों का निर्माण पूरा करना चाहिए।

उन्होंने तर्क दिया कि यदि जिला स्तर पर ही स्वास्थ्य सुविधाएं दुरुस्त हो जाएं, तो गरीब जनता को इलाज के लिए रांची का रुख नहीं करना पड़ेगा।

ग्रामीणों को राजनीतिक दलों से उम्मीद

दूसरी ओर, संघर्ष समिति के प्रतिनिधियों और स्थानीय ग्रामीणों ने सरकार के रवैये पर गहरी नाराजगी जताई है। ग्रामीणों का कहना है कि वे लंबे समय से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज उठा रहे हैं, लेकिन सरकार ने अब तक उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं सुना है।

नेता प्रतिपक्ष से मिले आश्वासन के बाद ग्रामीणों ने उम्मीद जताई है कि अब इस आंदोलन को अन्य राजनीतिक दलों का भी समर्थन मिलेगा, जिससे सरकार पर दबाव बढ़ेगा और उनकी कृषि भूमि सुरक्षित रह सकेगी।

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Written by
Yudhishthir Mahato

युधिष्ठिर महतो | पत्रकार एवं लेखक युधिष्ठिर महतो वर्ष 2017 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय पत्रकार, लेखक, गीतकार और जनसंपर्क पेशेवर हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत रिपोर्टर के रूप में की और समाचार पत्रों, न्यूज़ पोर्टलों तथा टीवी चैनलों में काम करते हुए मीडिया के विभिन्न प्रारूपों में अनुभव हासिल किया। वे झारखंड क्रांति खबर में उप-संपादक के रूप में भी कार्य कर चुके हैं। वर्तमान में वे पत्रकारिता के साथ जनसंपर्क एवं संचार कार्य से जुड़े हैं और धनबाद तथा झारखंड से संबंधित सामाजिक, राजनीतिक, प्रशासनिक एवं जनसरोकार के मुद्दों पर लगातार लिखते हैं। Aaryaa News पर उनके नाम से प्रकाशित खबरों में स्थानीय घटनाक्रम से लेकर राज्य की महत्वपूर्ण राजनीतिक एवं सामाजिक गतिविधियां शामिल हैं। उन्होंने बिनोद बिहारी महतो कोयलांचल विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एम.ए. किया है। पत्रकारिता के साथ उन्हें साहित्य और रचनात्मक लेखन में भी विशेष रुचि है। वे हिंदी और खोरठा में गीत एवं कविताएं लिखते हैं और उनके लिखे कई गीत विभिन्न ऑडियो प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हैं। पत्रकारिता, जनसंपर्क और रचनात्मक लेखन—इन तीनों क्षेत्रों में सक्रियता युधिष्ठिर महतो की पेशेवर पहचान को अलग आयाम देती है।

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