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श्रम कल्याण योजनाओं से भारत भर में 50 लाख से अधिक असंगठित श्रमिकों को सहायता मिलेगी

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कल्याण से सशक्तिकरण तक : मोदी सरकार के तहत श्रम कल्याण के क्षेत्र में 11 वर्षों में ऐतिहासिक सुधार

नई दिल्ली : श्रम एवं रोजगार मंत्रालय, श्रम कल्याण महानिदेशालय (डीजीएलडब्ल्यू) के माध्यम से भारत में असंगठित श्रमिकों, विशेष रूप से बीड़ी, फिल्म क्षेत्रों और खनन श्रमिकों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए समर्पित कई कल्याणकारी योजनाओं को लागू करना जारी रखता है। उल्लेखनीय है कि 50 लाख से अधिक श्रमिकों और उनके परिवारों पर सीधे प्रभाव डालने वाली ये योजनाएं सरकार की समावेशी और करुणा से प्रेरित श्रम कल्याण रणनीति की आधारशिला हैं।
डीजीएलडब्ल्यू के तहत कार्यरत श्रम कल्याण संगठन (एलडब्ल्यूओ) 18 कल्याण आयुक्तों के एक सुव्यवस्थित नेटवर्क के माध्यम से पूरे देश में इन योजनाओं का संचालन करता है, जो क्षेत्रीय स्तर पर कार्यान्वयन की देखरेख करते हैं। इसका मुख्य लक्ष्य अक्सर दूरदराज और हाशिए के श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा के लिए आर्थिक सहायता और आवास सहायता प्रदान करना है।

कल्याणकारी ढांचे के प्रमुख घटकों में से एक शिक्षा सहायता योजना है, जो बीड़ी, फिल्म क्षेत्रों और गैर-कोयला खदान श्रमिकों के बच्चों के लिए 1,000 रुपये से 25,000 रुपये तक की वार्षिक छात्रवृत्ति प्रदान करती है। राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल (एनएसपी) के माध्यम से कार्यान्वित की जाने वाली इस योजना में हर साल एक लाख से अधिक आवेदन प्राप्त होते हैं, जिसमें प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) पारदर्शी और समय पर उसका वितरण सुनिश्चित करता है।

स्वास्थ्य योजना के तहत स्वास्थ्य सेवा सहायता में डिस्पेंसरियों के राष्ट्रीय नेटवर्क के माध्यम से बाह्य रोगी सेवाएं, साथ ही हृदय रोग, किडनी प्रत्यारोपण, कैंसर, टीबी और छोटी सर्जरी जैसी गंभीर बीमारियों के लिए विशेष उपचार के खर्च शामिल हैं। बतौर आर्थिक सहायता छोटी सर्जरी के लिए 30,000 रुपये से लेकर कैंसर के इलाज के लिए 7.5 लाख रुपये तक दिए जाते है, जिससे कम आय वाले श्रमिकों के लिए जीवन रक्षक स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच सुनिश्चित होती है।

यद्यपि 2016 में शुरू की गई संशोधित एकीकृत आवास योजना (आरआईएचएस) को समाप्त कर अब इसे प्रधानमंत्री आवास योजना (पीएमएवाई) के साथ मिला दिया गया है। फिर भी मंत्रालय सभी के लिए आवास सम्मान के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता का सम्मान करते हुए 31 मार्च 2024 तक लाभार्थियों को लंबित किश्तों का वितरण जारी रखे हुए है।

ये लक्षित योजनाएं न केवल असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के जीवन की गुणवत्ता और सामाजिक सुरक्षा में सुधार लाती हैं, बल्कि सरकार के सबका साथ, सबका विकास के दृष्टिकोण को भी साकार करती हैं।

मंत्रालय कल्याण-संचालित शासन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि करता है तथा आगामी वर्षों में इसे और अधिक सुलभ, प्रौद्योगिकी-सक्षम तथा परिणाम-केंद्रित बनाने के लिए ढांचे को मजबूत करना जारी रखेगा।

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Written by
Yudhishthir Mahato

युधिष्ठिर महतो | पत्रकार एवं लेखक युधिष्ठिर महतो वर्ष 2017 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय पत्रकार, लेखक, गीतकार और जनसंपर्क पेशेवर हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत रिपोर्टर के रूप में की और समाचार पत्रों, न्यूज़ पोर्टलों तथा टीवी चैनलों में काम करते हुए मीडिया के विभिन्न प्रारूपों में अनुभव हासिल किया। वे झारखंड क्रांति खबर में उप-संपादक के रूप में भी कार्य कर चुके हैं। वर्तमान में वे पत्रकारिता के साथ जनसंपर्क एवं संचार कार्य से जुड़े हैं और धनबाद तथा झारखंड से संबंधित सामाजिक, राजनीतिक, प्रशासनिक एवं जनसरोकार के मुद्दों पर लगातार लिखते हैं। Aaryaa News पर उनके नाम से प्रकाशित खबरों में स्थानीय घटनाक्रम से लेकर राज्य की महत्वपूर्ण राजनीतिक एवं सामाजिक गतिविधियां शामिल हैं। उन्होंने बिनोद बिहारी महतो कोयलांचल विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एम.ए. किया है। पत्रकारिता के साथ उन्हें साहित्य और रचनात्मक लेखन में भी विशेष रुचि है। वे हिंदी और खोरठा में गीत एवं कविताएं लिखते हैं और उनके लिखे कई गीत विभिन्न ऑडियो प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हैं। पत्रकारिता, जनसंपर्क और रचनात्मक लेखन—इन तीनों क्षेत्रों में सक्रियता युधिष्ठिर महतो की पेशेवर पहचान को अलग आयाम देती है।

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