Home दिल्ली केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने इनफ्लीमेन की तीसरी वर्षगांठ पर किया संबोधित.
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केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने इनफ्लीमेन की तीसरी वर्षगांठ पर किया संबोधित.

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Union Minister Dr. Jitendra Singh addressed the gathering on the third anniversary of INFLIBNET.
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भारत में लिवर की महामारी और मधुमेह में वृद्धि एक व्यापक चयापचय संबंधी तंत्र का हिस्सा हैं : मिशन मोड में जन जागरूकता अभियान की आवश्यकता है – डॉ. जितेंद्र सिंह

शरीर का सबसे प्रतिरोध क्षमतापूर्ण अंग होने के बावजूद, लिवर अस्वास्थ्यकर खान-पान की आदतों, जीवनशैली संबंधी कारकों, अनियमित नींद के पैटर्न, तनावपूर्ण व्यवहार और पर्यावरणीय प्रदूषण के कारण तेजी से प्रभावित होता जा रहा है: डॉ. जितेंद्र सिंह

चयापचय संबंधी विकार तेजी से युवा भारतीयों को प्रभावित कर रहे हैं जिससे यह केवल एक चिकित्सा समस्या नहीं बल्कि एक राष्ट्रीय चिंता का विषय बन गया है : डॉ. जितेंद्र सिंह

नई दिल्ली : केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान और प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने शनिवार को कहा कि भारत में लिवर की महामारी और टाइप-2 मधुमेह में तीव्र वृद्धि एक व्यापक चयापचय संबंधी संबंध का हिस्सा है जिसमें फैटी लिवर, उच्च रक्तचाप, डिस्लिपिडेमिया और इंसुलिन प्रतिरोध जैसे विकार आपस में घनिष्ठ रूप से जुड़े हुए हैं और एक दूसरे के लिए जोखिम कारक हैं।

मंत्री ने कहा कि ये बीमारियां अब पहले की तुलना में बहुत कम उम्र में सामने आ रही हैं, जिससे यह चुनौती महज एक चिकित्सा समस्या से कहीं अधिक बड़ी हो गई है और प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी द्वारा मोटापे और जीवनशैली से संबंधित बीमारियों से निपटने पर दिए जा रहे निरंतर जोर के अनुरूप, निवारक स्वास्थ्य देखभाल और जन जागरूकता द्वारा संचालित एक राष्ट्रीय मिशन-मोड की आवश्यकता है।

डॉ. जितेंद्र सिंह नई दिल्ली स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बिलियरी साइंसेज (आईएलबीएस) में लिवर एंड मेटाबोलिक डिजीज नेटवर्क की तीसरी वर्षगांठ के अवसर पर संबोधित कर रहे थे। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के सहयोग से यह नेटवर्क भारत में बढ़ते लिवर और चयापचय संबंधी रोगों के बोझ से निपटने के लिए सहयोगात्मक अनुसंधान, नवाचार, शीघ्र निदान और साक्ष्य-आधारित नीतिगत उपायों को मजबूत करने का प्रयास कर रहा है।

इस कार्यक्रम में नीति आयोग के पूर्व सदस्य डॉ. विनोद पॉल; वैज्ञानिक और शैक्षणिक सहयोग के लिए फ्रांसीसी अटैची डॉ. सिल्वियान पाइड; आईएलबीएस के कुलपति प्रोफेसर मृदुल कुमार डागा; और आईएलबीएस के निदेशक प्रोफेसर शिव कुमार सरीन के अलावा देश भर के प्रमुख चिकित्सक, वैज्ञानिक और शोधकर्ता उपस्थित थे।

इनफ्लीमेन की अगुवाई करने के लिए प्रोफेसर शिव कुमार सरीन को बधाई देते हुए, डॉ. जितेंद्र सिंह ने इस पहल को एक ऐतिहासिक राष्ट्रीय मंच बताया, जिसमें भारत की सबसे तेजी से बढ़ती सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौतियों में से एक का सामना करने के लिए वैज्ञानिक संस्थान, चिकित्सक और शोधकर्ता एक साथ आए। उन्होंने कहा कि जनभागीदारी के साथ-साथ निरंतर वैज्ञानिक सहयोग, लिवर और चयापचय संबंधी विकारों के बढ़ते बोझ को कम करने के लिए महत्वपूर्ण होगा।

मंत्री ने कहा कि भारत में चयापचय संबंधी रोगों के महामारी विज्ञान में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल रहा है। जो बीमारियां पहले मुख्य रूप से मध्यम आयु वर्ग और बुजुर्ग आबादी से जुड़ी थीं, वे अब युवा वयस्कों और यहां तक ​​कि किशोरों में भी तेजी से पाई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि इस बदलते रोग स्वरूप को देखते हुए, उपचारात्मक स्वास्थ्य देखभाल से हटकर रोकथाम, शीघ्र निदान और जीवनशैली में बदलाव की ओर अग्रसर होना आवश्यक है।

भारत की अनूठी चयापचय संबंधी संरचना का उल्‍लेख करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि देश की आनुवंशिक प्रवृत्ति, केंद्रीय मोटापे की उच्च व्यापकता और विशिष्ट भारतीय शारीरिक बनावट के कारण यहाँ की आबादी मधुमेह, फैटी लिवर और हृदय रोगों के प्रति विशेष रूप से संवेदनशील है, यहाँ तक कि अपेक्षाकृत कम बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) वाले व्यक्तियों में भी। उन्होंने कहा कि ये विशेषताएँ अन्यत्र से प्राप्त प्रमाणों पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय भारतीय डेटा, भारतीय अनुसंधान और भारतीय समाधानों की आवश्यकता को बल देती हैं।

मंत्री ने कहा कि शरीर का सबसे प्रतिरोध क्षमतापूर्ण और पुनर्जीवित होने वाला अंग होने के बावजूद, लिवर अस्वास्थ्यकर खान-पान की आदतों, जीवनशैली संबंधी कारकों, अनियमित नींद के पैटर्न, तनावपूर्ण व्यवहार और पर्यावरण प्रदूषण के कारण लगातार तनावग्रस्त होता जा रहा है। उन्होंने कहा कि इन रोके जा सकने वाले कारणों का समाधान भारत की सार्वजनिक स्वास्थ्य रणनीति का अभिन्न अंग होना चाहिए।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने राष्ट्रीय लिवर बायोबैंक बनाने के लिए आईएलबीएस के प्रयासों का स्वागत किया और अपरिवर्तनीय क्षति होने से पहले लिवर रोग की पहचान करने में सक्षम किफायती प्रारंभिक निदान प्रौद्योगिकियों, सामुदायिक स्तर पर स्क्रीनिंग उपकरणों और स्वदेशी बायोमार्करों के विकास के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इस तरह की पहल किफायती, सुलभ और निवारक स्वास्थ्य सेवा के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को पूरा करती हैं।

वैज्ञानिक संस्थानों के बीच अधिक समन्वय का आह्वान करते हुए मंत्री ने कहा कि देश का बढ़ता जैव प्रौद्योगिकी तंत्र, जीनोम मिशन और व्यापक जीन अनुक्रमण कार्यक्रम भारत के अनूठे रोग पैटर्न को समझने के अभूतपूर्व अवसर प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि जैव प्रौद्योगिकी, जीनोमिक्स और कृत्रिम बुद्धिमत्ता में प्रगति सटीक चिकित्सा का मार्ग प्रशस्त कर रही है, जिससे व्यक्ति की आनुवंशिक प्रोफ़ाइल, जीवनशैली और पर्यावरणीय जोखिम के अनुरूप उपचार संभव हो सकेंगे।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि वैज्ञानिक प्रगति से ही इस चुनौती का समाधान नहीं हो सकता, जब तक कि इसके साथ व्यापक जन जागरूकता और व्यवहार में बदलाव न हो। उन्होंने चिकित्सा पेशेवरों, शोधकर्ताओं, शैक्षणिक संस्थानों, नागरिक समाज संगठनों और मीडिया से वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित स्वास्थ्य पद्धतियों को बढ़ावा देने और पोषण, मोटापा और जीवनशैली से संबंधित बीमारियों के बारे में गलत सूचनाओं का मुकाबला करने के लिए मिलकर काम करने का आह्वान किया।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने इस बात पर जोर देते हुए कहा कि स्वस्थ जनसंख्या विकसित भारत 2047 के दृष्टिकोण का मूल आधार है। उन्होंने कहा कि भारत में मधुमेह और फैटी लिवर रोग के बोझ को कम करना देश की युवा आबादी की उत्पादकता, आकांक्षाओं और क्षमता को संरक्षित करने के लिए आवश्यक है। उन्होंने कहा कि इन प्रयासों की सफलता से न केवल सार्वजनिक स्वास्थ्य मजबूत होगा बल्कि भारत की मानव पूंजी और राष्ट्रीय विकास में भी वृद्धि होगी।


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Written by
Yudhishthir Mahato

युधिष्ठिर महतो | पत्रकार एवं लेखक युधिष्ठिर महतो वर्ष 2017 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय पत्रकार, लेखक, गीतकार और जनसंपर्क पेशेवर हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत रिपोर्टर के रूप में की और समाचार पत्रों, न्यूज़ पोर्टलों तथा टीवी चैनलों में काम करते हुए मीडिया के विभिन्न प्रारूपों में अनुभव हासिल किया। वे झारखंड क्रांति खबर में उप-संपादक के रूप में भी कार्य कर चुके हैं। वर्तमान में वे पत्रकारिता के साथ जनसंपर्क एवं संचार कार्य से जुड़े हैं और धनबाद तथा झारखंड से संबंधित सामाजिक, राजनीतिक, प्रशासनिक एवं जनसरोकार के मुद्दों पर लगातार लिखते हैं। Aaryaa News पर उनके नाम से प्रकाशित खबरों में स्थानीय घटनाक्रम से लेकर राज्य की महत्वपूर्ण राजनीतिक एवं सामाजिक गतिविधियां शामिल हैं। उन्होंने बिनोद बिहारी महतो कोयलांचल विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एम.ए. किया है। पत्रकारिता के साथ उन्हें साहित्य और रचनात्मक लेखन में भी विशेष रुचि है। वे हिंदी और खोरठा में गीत एवं कविताएं लिखते हैं और उनके लिखे कई गीत विभिन्न ऑडियो प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हैं। पत्रकारिता, जनसंपर्क और रचनात्मक लेखन—इन तीनों क्षेत्रों में सक्रियता युधिष्ठिर महतो की पेशेवर पहचान को अलग आयाम देती है।

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